मुंबई की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। देश की सबसे अमीर नगर निगम कही जाने वाली बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) का मेयर बनने जा रहा है। वरिष्ठ पार्षद रितु तावड़े को मुंबई का नया मेयर चुने जाने की पूरी तैयारी हो चुकी है, जबकि शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के नेता संजय शंकर घाड़ी डिप्टी मेयर का पद संभालेंगे। यह बदलाव मुंबई की सियासत में सत्ता संतुलन को पूरी तरह नए सिरे से परिभाषित करता है।
करीब ढाई दशक तक बीएमसी पर शिवसेना का दबदबा रहा, लेकिन 2025 के नगर निगम चुनावों ने यह परंपरा तोड़ दी। भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) को 29 सीटें मिलीं। महायुति गठबंधन के भीतर हुए सत्ता-साझाकरण समझौते के तहत भाजपा को मेयर पद और शिवसेना को डिप्टी मेयर पद दिया गया है।
रितु तावड़े का राजनीतिक सफर बीएमसी की राजनीति में अनुभव और निरंतरता का उदाहरण है। उन्होंने 2012 में पहली बार वार्ड 127 से पार्षद बनकर नगर निगम में कदम रखा। इसके बाद 2017 में घाटकोपर के वार्ड 121 और फिर 2025 में वार्ड 132 से जीत दर्ज कर उन्होंने अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ साबित की। तीन बार पार्षद चुना जाना यह दर्शाता है कि तावड़े को ज़मीनी स्तर पर जनता का भरोसा हासिल है।
बीएमसी में शिक्षा समिति की अध्यक्ष रहते हुए रितु तावड़े ने कई अहम फैसले लिए। सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा और विद्यार्थियों की सुविधाओं पर उनका फोकस चर्चा में रहा। यही कारण है कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें मेयर जैसे अहम पद के लिए उपयुक्त माना।
राजनीतिक दृष्टि से रितु तावड़े की खास बात यह है कि वे मराठा समुदाय से आती हैं, लेकिन उन्होंने गुजराती बहुल वार्ड में लगातार जीत दर्ज की। यह उनकी सर्वसमावेशी राजनीति और विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास कायम करने की क्षमता को दर्शाता है। फिलहाल वे महाराष्ट्र भाजपा महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष भी हैं और संगठनात्मक स्तर पर उनकी सक्रिय भूमिका रही है।
डिप्टी मेयर पद के लिए चुने गए संजय शंकर घाड़ी शिवसेना (शिंदे गुट) के अनुभवी नेता माने जाते हैं। पार्टी प्रमुख और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के निर्देश पर उनका नाम तय किया गया। शिवसेना नेतृत्व का मानना है कि घाड़ी नगर निगम प्रशासन में समन्वय और संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
बीएमसी का बजट कई राज्यों से भी बड़ा माना जाता है। ऐसे में भाजपा के हाथ मेयर पद आना केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से बेहद अहम है। शहर के बुनियादी ढांचे, सड़कें, जल आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा जैसे मुद्दों पर अब भाजपा की नीतियों की सीधी झलक देखने को मिलेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुंबई में मेयर पद पर भाजपा की जीत महाराष्ट्र की राजनीति में पार्टी की स्थिति को और मजबूत करेगी। आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिहाज से भी यह बदलाव बेहद अहम माना जा रहा है। वहीं, विपक्ष इसे सत्ता के केंद्रीकरण के रूप में देख रहा है और आने वाले समय में नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ी नजर रखने की बात कर रहा है।