संसद भवन के बाहर CJP प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस, सुरक्षा बढ़ी; अभिजीत दीपके ने खत्म की भूख हड़ताल

Vin News Network
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संसद मार्च के दौरान संसद भवन के बाहर कड़ी सुरक्षा

विन न्यूज़ नेटवर्क। नई दिल्ली में संसद भवन के सामने सीजेपी प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागे गए। इसके साथ ही संसद भवन के कई प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए। इस बीच CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने बातचीत का हवाला देते हुए अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने का ऐलान किया।संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘संसद चलो’ अभियान के दौरान राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह अलर्ट मोड पर रही। जंतर-मंतर से निकला प्रदर्शन संसद भवन के करीब पहुंचने पर तनावपूर्ण स्थिति में बदल गया। प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग के साथ आंसू गैस के गोले छोड़े, जिसके बाद भीड़ को पीछे हटना पड़ा।

घटनाक्रम के दौरान संसद की कार्यवाही जारी थी और सुरक्षा एजेंसियों ने एहतियात के तौर पर संसद भवन के कई प्रवेश द्वार अस्थायी रूप से बंद कर दिए। पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल और अर्धसैनिक जवानों की तैनाती की गई।

संसद परिसर के आसपास सुरक्षा और कड़ी

प्रदर्शनकारियों के संसद क्षेत्र तक पहुंचने की कोशिश के बाद सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई। पुलिस ने संसद मार्ग और आसपास के संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी। हालात का जायजा लेने के लिए दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और पुलिस आयुक्त भी संसद मार्ग थाना पहुंचे।

सूत्रों के अनुसार, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कई स्तरों पर सुरक्षा घेरा बनाया गया ताकि संसद की कार्यवाही और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो।

सुबह से जारी रहा प्रदर्शन

दिन की शुरुआत से ही बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ने लगे थे। रास्ते में कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए गए थे। कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेड पार कर संसद मार्ग क्षेत्र तक पहुंच गए, जबकि कुछ समूह राजीव चौक और मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन के आसपास भी दिखाई दिए। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की।

CJP का आरोप- दमन से नहीं दबेगी आवाज

पुलिस की कार्रवाई के बाद CJP ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वालों के साथ बल प्रयोग उचित नहीं है। संगठन का कहना है कि छात्रों और युवाओं की समस्याओं का समाधान संवाद से निकलना चाहिए, न कि दमनात्मक कदमों से।

संगठन ने यह भी दोहराया कि उनका आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर है।

अभिजीत दीपके ने खत्म की भूख हड़ताल

घटनाक्रम के बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि सरकार के साथ बातचीत का दौर शुरू हो चुका है। इसी वजह से फिलहाल आंदोलन को स्थगित रखने की अपील की गई है।

दीपके ने समर्थकों से शांति बनाए रखने और आगे की रणनीति संगठन के निर्देशों के अनुसार तय करने की बात कही।

सोनम वांगचुक की ओर से भी आया संदेश

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल प्रशासन से संसद मार्च में शामिल होने के लिए अस्थायी रूप से अस्पताल से बाहर जाने की अनुमति मांगी। उन्होंने पत्र में कहा कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति सामान्य है और वे आंदोलन में शामिल होकर अपनी बात रखना चाहते हैं।

वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने भी कहा कि यदि सरकार या सांसद शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को संसद में उठाने का स्पष्ट आश्वासन देते हैं, तो वांगचुक अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने पर विचार करेंगे।

विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना

प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार की आलोचना की।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि छात्रों पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और सरकार को संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।

वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.सी. वेणुगोपाल ने भी कहा कि लंबे समय से भूख हड़ताल कर रहे लोगों के प्रति सरकार को संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक आंदोलनों का समाधान बातचीत से निकाला जाना चाहिए।

सीपीआई(एम) ने भी जताया समर्थन

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई-एम) ने भी प्रदर्शन से जुड़ा एक वीडियो साझा करते हुए छात्रों और युवाओं के आंदोलन का समर्थन किया। पार्टी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है तथा छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

आंदोलन की मुख्य मांगें

CJP और आंदोलन से जुड़े संगठनों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं-

  • प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच।
  • शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करना।
  • नीट परीक्षा विवाद को लेकर कार्रवाई।
  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग।
  • सरकारी नौकरियों में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाना।
  • युवाओं के रोजगार से जुड़े मुद्दों पर ठोस नीति बनाना।

फिलहाल क्या है स्थिति?

दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। संसद क्षेत्र और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक कड़ी कर दी गई है। दूसरी ओर, सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत की संभावनाओं पर भी सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन किस दिशा में जाएगा, यह वार्ता और प्रशासनिक फैसलों पर निर्भर करेगा।

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