पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में अंदरूनी हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और लोकसभा सांसद मनीष तिवारी के पार्टी छोड़ने की अटकलों ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। हालांकि अभी तक न तो मनीष तिवारी और न ही कांग्रेस की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है, लेकिन हालिया घटनाक्रम और उनकी सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
दरअसल, कांग्रेस आलाकमान ने हाल ही में पंजाब प्रदेश संगठन में बड़े बदलाव की संभावनाओं पर विराम लगाते हुए स्पष्ट कर दिया कि फिलहाल प्रदेश नेतृत्व में कोई बड़ा फेरबदल नहीं किया जाएगा। पार्टी के इस फैसले के बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि मनीष तिवारी संगठन के निर्णय से नाराज हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी नाराजगी आने वाले दिनों में पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
कांग्रेस के फैसले के अगले ही दिन मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया पर एक ऐसा संदेश साझा किया, जिसने इन अटकलों को और हवा दे दी। उन्होंने लिखा, “है बड़ा कोई अवगुण उसमें, जिसे कोई हुनर आवे।” इसके बाद उन्होंने एक और टिप्पणी करते हुए कहा, “काश मेरे पास लोगों और संस्थाओं की असुरक्षाओं का भी कोई अचूक इलाज होता।” उनकी इस पोस्ट को राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि अपने संदेश में मनीष तिवारी ने यह भी लिखा कि पिछले 45 वर्षों में उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से बहुत कुछ मिला है और उन्होंने अपने पूरे वयस्क जीवन को पार्टी की सेवा के लिए समर्पित किया है। पोस्ट के अंत में उन्होंने प्रसिद्ध अंग्रेजी गीत की पंक्ति “Que sera, sera, Whatever will be, will be” लिखी, जिसका अर्थ है “जो होगा, सो होगा।” इसी पंक्ति ने उनके भविष्य को लेकर चर्चाओं को और तेज कर दिया।

इस बीच कांग्रेस ने पंजाब संगठन को लेकर अपने फैसले भी सार्वजनिक कर दिए हैं। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ही पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने रहेंगे, जबकि प्रताप सिंह बाजवा विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता की जिम्मेदारी निभाते रहेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।
इसके अलावा कांग्रेस ने चुनावी तैयारियों को मजबूत करने के लिए कई अन्य नियुक्तियां भी की हैं। सुखजिंदर सिंह रंधावा को कोर कमेटी का अध्यक्ष, विजय इंदर सिंघला को चुनाव प्रबंधन एवं समन्वय समिति का प्रमुख और अमर सिंह को घोषणापत्र समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वहीं, सुखविंदर सिंह डैनी, राजकुमार वेरका और संगत सिंह गिलजियां को पंजाब कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। इसके साथ ही सुखपाल सिंह खैरा, राणा गुरजीत सिंह और धर्मवीर गांधी को चुनाव अभियान समिति का सह-अध्यक्ष बनाया गया है।
फिलहाल मनीष तिवारी के पार्टी छोड़ने की खबरों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर चल रही गतिविधियों पर सभी की नजर बनी हुई है। यदि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कोई बड़ा फैसला होता है, तो इसका असर राज्य की राजनीति और कांग्रेस की चुनावी रणनीति दोनों पर पड़ सकता है।