छात्र आंदोलन पर खेल जगत दो धड़ों में! जंतर-मंतर पहुंचे बजरंग पूनिया, बबीता फोगाट ने सरकार पर जताया भरोसा

Vin News Network
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छात्र आंदोलन पर खिलाड़ियों की एंट्री

विन न्यूज़ नेटवर्क। दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन अब केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं रह गया है। फिल्म और खेल जगत की कई चर्चित हस्तियां भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रही हैं। पहले क्रिकेटर युवराज सिंह और शिखर धवन ने छात्रों के पक्ष में शांति और संवाद की बात कही थी। अब ओलंपिक पदक विजेता पहलवान बजरंग पूनिया और भाजपा नेता एवं पूर्व पहलवान बबीता फोगाट के बयान चर्चा का विषय बन गए हैं।

जहां बजरंग पूनिया ने जंतर-मंतर पहुंचकर आंदोलनकारियों के प्रति अपना समर्थन जताया, वहीं बबीता फोगाट ने केंद्र सरकार पर भरोसा जताते हुए सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील की।

20 जुलाई की घटना के बाद बढ़ा समर्थन

20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा संसद मार्च के आह्वान के दौरान दिल्ली में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। इस दौरान पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया, जिसमें कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए।

इस घटना के बाद छात्र आंदोलन को देशभर से समर्थन मिलने लगा। सामाजिक कार्यकर्ताओं, कलाकारों और खिलाड़ियों ने अलग-अलग मंचों से अपनी राय रखी। इसी क्रम में अब बजरंग पूनिया भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे।

बजरंग पूनिया ने वीडियो जारी कर जताया समर्थन

ओलंपिक पदक विजेता बजरंग पूनिया ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने अपने वीडियो में कहा कि जनता के मुद्दों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और सत्ता में बैठे लोगों को जवाबदेह होना चाहिए।

उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि सरकार जनता की भावनाओं और विश्वास का सम्मान नहीं करेगी तो धीरे-धीरे हर वर्ग प्रभावित होगा। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और इस पर समर्थकों व विरोधियों दोनों की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

बजरंग का जंतर-मंतर पहुंचना भी छात्र आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है।

बबीता फोगाट ने की संयम और संवाद की अपील

दूसरी ओर कॉमनवेल्थ गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता और भाजपा नेता बबीता फोगाट ने इस पूरे मुद्दे पर अलग रुख अपनाया।

उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि समाज और देश के लिए लगातार काम करने वाले सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर उन्हें चिंता है। उन्होंने वांगचुक से आग्रह किया कि वे अपना अनशन समाप्त करें और अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें।

बबीता ने अपने संदेश में कहा कि उन्हें विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह संवेदनशील है।

‘संवाद ही लोकतंत्र का सबसे मजबूत रास्ता’

बबीता फोगाट ने अपने बयान में कहा कि छात्रों के भविष्य, रोजगार और कौशल विकास को लेकर केंद्र सरकार लगातार कई योजनाओं पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी विवाद का समाधान संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया के जरिए ही संभव है।

उनका कहना था कि सरकार और आंदोलनकारियों दोनों को बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए ताकि छात्रों के हितों की रक्षा हो सके और विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकल सके।

खेल जगत से आ रहे अलग-अलग संदेश

छात्र आंदोलन को लेकर खेल जगत के भीतर भी अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। कुछ खिलाड़ी आंदोलनकारियों के समर्थन में खुलकर सामने आ रहे हैं, जबकि कुछ संवाद और संस्थागत समाधान पर जोर दे रहे हैं।

युवराज सिंह और शिखर धवन ने पहले ही शांति, बातचीत और छात्रों के सुरक्षित भविष्य की वकालत की थी। अब बजरंग पूनिया और बबीता फोगाट के अलग-अलग रुख ने इस बहस को और व्यापक बना दिया है।

जंतर-मंतर आंदोलन बना राष्ट्रीय चर्चा का विषय

दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन अब शिक्षा व्यवस्था से आगे बढ़कर राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन चुका है। इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों, कलाकारों और खिलाड़ियों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब सार्वजनिक जीवन से जुड़े प्रभावशाली लोग किसी आंदोलन पर अपनी राय रखते हैं तो उसका सामाजिक प्रभाव भी बढ़ता है। हालांकि, समाधान के लिए सरकार और आंदोलनकारियों के बीच सार्थक संवाद को ही सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आगे क्या होगा?

छात्र आंदोलन के बीच सरकार की ओर से फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की घोषणा की जा चुकी है। इसके बावजूद प्रदर्शन जारी है और आंदोलनकारी अपनी प्रमुख मांगों पर कायम हैं।

ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में सरकार और छात्र संगठनों के बीच बातचीत का कोई ठोस रास्ता निकलता है या नहीं। फिलहाल, खेल जगत के बड़े नामों की एंट्री ने इस आंदोलन को नई चर्चा और व्यापक राष्ट्रीय ध्यान जरूर दिलाया है।

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