‘Sour Grapes?’: भारत-ईयू फ्री ट्रेड डील पर कांग्रेस की आलोचना पर पीयूष गोयल का पलटवार, बताया ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’

Vin News Network
Vin News Network
5 Min Read
कांग्रेस की आलोचना पर पीयूष गोयल का जवाब, भारत-ईयू समझौते का बचाव

भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हाल ही में संपन्न फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कांग्रेस नेता जयराम रमेश की आलोचना पर कड़ा जवाब दिया। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर विस्तृत पोस्ट में गोयल ने कांग्रेस की टिप्पणियों को ‘sour grapes’ करार देते हुए कहा कि यह समझौता भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़े अवसर खोलेगा और इसे लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है।

कांग्रेस की आलोचना पर मंत्री का जवाब
पीयूष गोयल ने अपने पोस्ट में कहा,
“यह दिलचस्प है कि जो लोग अतीत में निर्णय नहीं ले पाए, आज वही कुछ न करने को ही उपलब्धि बताने की कोशिश कर रहे हैं।”

उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती दौर में फैसलों की कमी के कारण देश को रोजगार, आय और आर्थिक वृद्धि के अवसरों में भारी नुकसान उठाना पड़ा। मंत्री ने पूछा कि क्या कांग्रेस की मौजूदा प्रतिक्रिया केवल “sour grapes” का उदाहरण है।

जयराम रमेश ने क्या सवाल उठाए
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भारत-ईयू एफटीए को “हद से ज्यादा प्रचारित” करार देते हुए इसकी पृष्ठभूमि पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस समझौते की बातचीत जून 2007 में शुरू हुई थी, 16 दौर की वार्ताओं के बाद मई 2013 में इसे रोक दिया गया और फिर जून 2022 में इसे दोबारा शुरू किया गया।

रमेश ने आशंका जताई कि ईयू के 96 प्रतिशत से अधिक निर्यात पर शुल्क में कटौती से भारत में आयात बढ़ सकता है और व्यापार घाटा गहरा सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार एल्युमिनियम और स्टील निर्यातकों को ईयू के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) से छूट दिलाने में विफल रही है। उनके अनुसार, इस कारण निर्यात पहले ही 7 अरब डॉलर से घटकर 5 अरब डॉलर रह गया है और 1 जनवरी 2026 से स्थिति और खराब हो सकती है।

‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ पर गोयल का तर्क
इन आरोपों को खारिज करते हुए पीयूष गोयल ने लिखा,
“जब पूरी दुनिया इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कह रही है, तब मेरे मित्र इसे हाइप बता रहे हैं, यह समझ से परे है।”

उन्होंने भारत और ईयू की संयुक्त जीडीपी लगभग 25 ट्रिलियन डॉलर, वैश्विक व्यापार 11 ट्रिलियन डॉलर और दो अरब लोगों के साझा बाजार का हवाला दिया। गोयल ने कहा कि अगर भारत के श्रम-प्रधान निर्यात का 33 अरब डॉलर पहले दिन से शून्य शुल्क पर पहुंच रहा है, तो इसे महज प्रचार नहीं कहा जा सकता।

CBAM, नियम और बौद्धिक संपदा पर सफाई
कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म पर गोयल ने कहा,
“हमारी सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है और समाधान के रास्ते तलाशे जा रहे हैं।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े नियम सभी देशों का अधिकार हैं और समझौते में यह सुनिश्चित किया गया है कि ये नियम अनुचित व्यापार बाधा न बनें। बौद्धिक संपदा अधिकारों पर उन्होंने कहा कि दायित्व विश्व व्यापार संगठन (WTO) के ट्रिप्स (TRIPS) मानकों के अनुरूप हैं और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी लचीलापन बरकरार रखा गया है।

सेवाओं, ऑटोमोबाइल और ईंधन पर सरकार का पक्ष
सेवाओं के क्षेत्र में गोयल ने कहा कि प्रतिबद्धताएं भारत की घरेलू नीतियों के अनुरूप हैं और इससे यूरोपीय निवेश व तकनीक को बढ़ावा मिलेगा।
ऑटोमोबाइल सेक्टर पर उन्होंने बताया कि कोटा-आधारित और चरणबद्ध पेशकश ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूत करने के लिए है, ताकि यूरोपीय कंपनियां पहले स्थानीय असेंबली और फिर पूर्ण स्थानीयकरण की ओर बढ़ें।

रिफाइंड ईंधन निर्यात पर उन्होंने कहा कि यह मुद्दा बाहरी कारणों से जुड़ा है और एफटीए दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी पर आधारित है।

समझौते की पृष्ठभूमि
27 जनवरी को नई दिल्ली में हुए भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। उस समय पीयूष गोयल ने इसे “दुनिया के लिए एक मजबूत साझेदारी” बताया था। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भी इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा और इसे व्यापक रणनीतिक रिश्ते की शुरुआत बताया।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *