लखनऊ में स्वामी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर सियासत गरमा गई है। लखनऊ विकास प्राधिकरण की स्मारक समिति और पुलिस ने कुल 26 शर्तें लगाते हुए इस कार्यक्रम को सशर्त अनुमति दी है। इस फैसले पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और योगी सरकार पर जमकर निशाना साधा है।
अखिलेश का तंज “शर्तों का अंबार”
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अखिलेश यादव ने लिखा कि सरकार को तो यह शर्त भी रख देनी चाहिए थी कि “आंख और मुंह कितने सेंटीमीटर खुल सकते हैं।” उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि जिसे कुछ पसंद नहीं आता, वह शर्तों का अंबार लगा देता है।
“भाजपाई सनातन का सम्मान नहीं कर सकते तो अपमान भी न करें”
यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री ने इस मामले को सनातन धर्म के अपमान से जोड़ते हुए कहा कि अगर भाजपाई सनातन का सम्मान नहीं कर सकते तो कम से कम अपमान तो न करें। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की अहंकारी सरकार जिस समाज की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है, वह समाज अब सब समझ रहा है।
अखिलेश ने यहां तक कह दिया कि भाजपा सरकार में मंत्री, सांसद, विधायक और पार्षद बने उसी समाज के लोग भी इस मामले में अपने समाज से मुंह छिपा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग भाजपा की भट्टी पर अपने स्वार्थ की रोटी सेंक रहे हैं, वे अपने ही समाज में सम्मान खो चुके हैं और जनता अगले चुनाव में उन्हें सबक जरूर सिखाएगी।
कोविड का हवाला देकर कसा तंज
अखिलेश यादव ने आगे लिखा कि क्या कोविड-19 अभी भी चल रहा है? अगर हां, तो सरकार बताए कि उनकी अपनी किस बैठक या भाजपा के किस आयोजन में इसका आखिरी बार पालन हुआ। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या भाजपाइयों की भूमिगत बैठकों में भी यही नियम लागू होते हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि कहीं इसी कारण “बाटी-चोखा” वाली बैठक पर पाबंदी तो नहीं लगाई गई थी।
“विनाशकाले विपरीत बुद्धि”
अपनी पोस्ट के अंत में अखिलेश यादव ने कहा कि अतार्किक बंदिशें लगाना कमजोर सत्ता की पहचान होती है। उन्होंने इस पूरे मामले को “निंदनीय, घोर आपत्तिजनक और विनाशकाले विपरीत बुद्धि” करार दिया।
यह विवाद आने वाले दिनों में और गहराने के आसार हैं क्योंकि धार्मिक आयोजनों पर इस तरह की शर्तें लगाना विपक्ष को सरकार पर हमले का एक और मौका दे रहा है।