विन न्यूज़ नेटवर्क। NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर 26 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आखिरकार अपना अनशन समाप्त कर दिया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में उन्हें जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया गया। लंबे समय से जारी इस आंदोलन के बाद सरकार और वांगचुक के बीच हुई बातचीत सकारात्मक मोड़ पर पहुंची, जिसके बाद यह फैसला लिया गया।
शुक्रवार सुबह जारी अपने वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने बताया कि पिछले दो दिनों से सरकार के साथ लगातार बातचीत चल रही थी। कई दौर की चर्चा के बाद सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद उन्होंने अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद सबसे मजबूत माध्यम है और जब सरकार ने भरोसा दिया है तो आगे की लड़ाई बातचीत और संवैधानिक तरीके से जारी रहेगी।

सरकार ने किन मांगों पर दिया भरोसा?
सोनम वांगचुक के मुताबिक सरकार ने तीन अहम मुद्दों पर लिखित आश्वासन दिया है। पहला, आंदोलन में शामिल छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई नया मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। दूसरा, NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने के मुद्दे पर संसद में चर्चा कराई जाएगी। तीसरा, परीक्षा से जुड़े तनाव के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
वांगचुक ने कहा कि उनके लिए सबसे जरूरी यह सुनिश्चित करना था कि आंदोलन में शामिल छात्रों को किसी तरह की कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े। उन्होंने इसे अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सरकार ने नहीं दिया आश्वासन
हालांकि, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार की ओर से कोई सहमति नहीं बनी। इस मुद्दे पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए वांगचुक ने कहा कि सरकार ने इस संबंध में कोई लिखित या मौखिक आश्वासन नहीं दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी एक व्यक्ति को हटाना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार सुनिश्चित करना है। उनके मुताबिक यदि छात्रों की सुरक्षा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित होती है तो आंदोलन का मकसद काफी हद तक पूरा होगा। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का मुद्दा आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से उठाया जाएगा।
65 सांसदों ने दिया समर्थन
सोनम वांगचुक ने बताया कि आंदोलन के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने उनसे मुलाकात की या संदेश भेजकर समर्थन जताया। इन सांसदों ने भरोसा दिलाया कि वे संसद में NEET पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे।
उन्होंने कहा कि इस व्यापक समर्थन ने उन्हें विश्वास दिलाया कि यह सिर्फ उनका व्यक्तिगत आंदोलन नहीं, बल्कि देशभर के छात्रों और अभिभावकों की आवाज बन चुका है।
‘जान बचाना भी जरूरी था’
वांगचुक ने कहा कि उनके सामने दो रास्ते थे। पहला, अनशन जारी रखकर अपनी जान को खतरे में डालना और दूसरा, आंदोलन को आगे भी जारी रखने के लिए खुद को सुरक्षित रखना। उन्होंने बताया कि हजारों छात्रों, अभिभावकों और शुभचिंतकों ने उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की थी।
इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए अनशन समाप्त करने का फैसला किया, ताकि भविष्य में भी शिक्षा सुधार और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की लड़ाई जारी रख सकें।
आंदोलन रहेगा जारी
अनशन समाप्त होने के बावजूद सोनम वांगचुक ने साफ कर दिया कि शिक्षा सुधार की लड़ाई खत्म नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जिन मुद्दों पर भरोसा दिया है, उन पर अमल की निगरानी की जाएगी। यदि वादे पूरे नहीं हुए तो आगे भी लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने छात्रों से भी संयम बनाए रखने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की। वांगचुक ने कहा कि लोकतंत्र में संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया के जरिए ही स्थायी समाधान निकल सकता है।