विन न्यूज़ नेटवर्क। सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस दौरान देशभर के शिवालयों में जलाभिषेक, कांवड़ यात्रा और रुद्राभिषेक जैसे धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व रहता है। अब बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने घरों में भी रुद्राभिषेक का आयोजन कर रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विधि-विधान से किया गया रुद्राभिषेक भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने, मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और जीवन की बाधाओं को दूर करने का माध्यम माना जाता है।
हालांकि, केवल श्रद्धा ही नहीं बल्कि पूजा के नियमों का सही पालन भी उतना ही आवश्यक माना गया है। जानकारों के अनुसार यदि पूजा के दौरान कुछ महत्वपूर्ण बातों की अनदेखी हो जाए तो अपेक्षित शुभ फल मिलने में बाधा आ सकती है।
रुद्राभिषेक से पहले घर और पूजा स्थल की करें शुद्ध तैयारी
धार्मिक जानकारों के अनुसार, रुद्राभिषेक शुरू करने से पहले पूरे घर की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए। जिस स्थान पर पूजा होनी है, वहां स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। पूजा स्थल पर साफ आसन बिछाकर शिवलिंग की स्थापना शुभ दिशा में करें। सामान्य मान्यता है कि शिवलिंग उत्तर दिशा की ओर स्थापित किया जाए और पूजा करने वाला पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठे। यदि दिशा को लेकर कोई संशय हो तो किसी योग्य विद्वान या पुरोहित से मार्गदर्शन लेना उचित माना जाता है।
पति-पत्नी मिलकर लें पूजा का संकल्प
यदि संभव हो तो दंपति को एक साथ बैठकर रुद्राभिषेक का संकल्प लेना चाहिए। पूजा की शुरुआत में जल लेकर अपना नाम, गोत्र और मनोकामना का संकल्प किया जाता है। इसके बाद भगवान शिव का अभिषेक प्रारंभ किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इसे पारिवारिक सुख, सौहार्द और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है।
अभिषेक के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
रुद्राभिषेक जल, दूध या अन्य पूजन सामग्री से किया जा सकता है। अभिषेक के लिए ऐसे पात्र का उपयोग करना शुभ माना जाता है जिससे शिवलिंग पर जल की धारा लगातार प्रवाहित होती रहे। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर जल या दूध अर्पित करें। इसके बाद चंदन, बेलपत्र, पुष्प, अक्षत, काले तिल, शहद और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।
तामसिक भोजन से करें परहेज
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस घर में रुद्राभिषेक हो रहा हो वहां पूजा पूरी होने तक तामसिक भोजन बनाने और सेवन करने से बचना चाहिए। यदि संभव हो तो अनुष्ठान करने वाले श्रद्धालु उपवास रखें और पूरे मन से भगवान शिव की आराधना करें। ऐसा करने से पूजा का आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
ब्रह्म मुहूर्त में पूजा करना माना जाता है शुभ
रुद्राभिषेक के लिए ब्रह्म मुहूर्त का समय अत्यंत शुभ माना गया है। इस समय स्नान करने के बाद शिवलिंग का जलाभिषेक करें, फिर कलश स्थापित कर संकल्प लें और पूरे विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न करें। मान्यता है कि सावन में श्रद्धा और नियमों के साथ किया गया रुद्राभिषेक भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम बनता है।