दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके की जांच में एक नया मोड़ सामने आया है। पुलिस को शक है कि इस मामले का लिंक पाकिस्तान और तुर्की में सक्रिय कुछ नेटवर्क से हो सकता है। इसी वजह से दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जांच को और तेज कर दिया है। पुलिस अब उन विदेशी MBBS छात्रों की जानकारी भी जुटा रही है जो पिछले कुछ सालों में भारत आए हैं या यहां पढ़ाई कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि कुछ छात्रों का इस्तेमाल फंड ट्रांसफर, मोबाइल सिम, किराए के कमरे या स्थानीय स्तर पर मदद जैसे कामों के लिए किया गया हो सकता है। इसी एंगल को ध्यान में रखते हुए मेडिकल काउंसिल और कॉलेजों से विदेशी छात्रों का पूरा डेटा मांगा गया है।
धमाके की जगह से मिले कुछ डिजिटल और तकनीकी सबूतों ने जांच टीम को पाकिस्तान और तुर्की में मौजूद संदिग्धों तक पहुंचाया है। एजेंसियों को यह भी शक है कि धमाके की योजना बनाने में विदेशों में बैठे कुछ लोग तकनीकी या ऑनलाइन सहायता दे रहे थे। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि विस्फोटक कम तीव्रता का था, जिसका उद्देश्य किसी बड़े नुकसान से ज्यादा लोगों में डर फैलाना हो सकता है। धमाके की टाइमिंग और लोकेशन से लगता है कि यह घटना पूरी योजना के तहत की गई थी। घटनास्थल से पुलिस को प्लास्टिक कंटेनर, वायर और कुछ इलेक्ट्रॉनिक हिस्से भी मिले हैं।
इस मामले में केंद्रीय एजेंसियाँ—NIA, IB और RAW—भी सक्रिय हो गई हैं। सभी एजेंसियाँ अपने-अपने स्तर पर जानकारी जुटा रही हैं और जांच से जुड़े अहम इनपुट एक-दूसरे से साझा कर रही हैं। अगर विदेशी MBBS छात्रों से जुड़ी कोई पुख्ता कड़ी सामने आती है, तो जांच कई अन्य शहरों तक बढ़ सकती है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी गंभीरता के साथ हर दिशा में की जा रही है और कोई भी सुराग नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।