बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। नरसिंदी ज़िले में 23 वर्षीय हिंदू युवक चंचल चंद्र भौमिक को उसकी ही दुकान के अंदर जिंदा जला दिया गया। यह वारदात शुक्रवार रात, 23 जनवरी की बताई जा रही है। पीड़ित के परिवार और स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई हादसा नहीं, बल्कि पूर्वनियोजित हत्या थी।
दुकान बंद कर पेट्रोल डालकर लगाई गई आग
मिली जानकारी के अनुसार, चंचल भौमिक पिछले छह वर्षों से नरसिंदी में एक स्थानीय गैरेज में काम करता था और वहीं अपनी छोटी दुकान में रह रहा था। घटना की रात वह दुकान के अंदर सो रहा था। आरोप है कि हमलावर ने पहले बाहर से दुकान का शटर बंद किया, फिर पेट्रोल डालकर पूरी जगह में आग लगा दी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग लगाने के बाद आरोपी मौके से तुरंत नहीं भागा, बल्कि बाहर खड़ा रहा और यह सुनिश्चित किया कि चंचल बाहर न निकल सके। जब युवक की जलकर मौत हो गई, तब हमलावर वहां से फरार हुआ।
परिवार का इकलौता सहारा था चंचल
चंचल अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। उसके पिता का पहले ही निधन हो चुका था। परिवार में उसकी बीमार मां, एक दिव्यांग बड़ा भाई और एक छोटा भाई शामिल हैं, जिनकी पूरी जिम्मेदारी उसी पर थी। परिवार ने बताया कि चंचल बेहद मेहनती, शांत स्वभाव का और ईमानदार युवक था। उसका किसी से कोई विवाद या दुश्मनी नहीं थी। वह दिन-रात काम करके अपने परिवार का पेट पाल रहा था।
स्थानीय लोगों ने जताया साजिश का शक
इलाके के निवासियों और गैरेज मालिक ने भी चंचल के बारे में यही कहा कि वह एक सीधा-सादा और भरोसेमंद इंसान था। किसी भी तरह के व्यक्तिगत झगड़े का कोई रिकॉर्ड नहीं था। इसी वजह से परिवार और पड़ोसियों को शक है कि हत्या के पीछे धार्मिक नफरत एक अहम कारण हो सकता है। लोगों का कहना है कि जिस तरह से शटर बंद कर आग लगाई गई, वह इस बात का संकेत है कि अपराध पहले से योजना बनाकर किया गया।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
चंचल भौमिक की हत्या कोई अकेली घटना नहीं है। इससे पहले भी बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के लोगों को इसी तरह निशाना बनाया गया है, जिससे पूरे देश में डर का माहौल बना हुआ है। 31 दिसंबर को बांग्लादेश के शरियतपुर ज़िले में 50 वर्षीय हिंदू कारोबारी खोकोन दास की भी इसी तरह हत्या कर दी गई थी। खोकोन दास एक छोटी दवा की दुकान चलाते थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, घर लौटते समय उन पर भीड़ ने हमला किया, पहले चाकू मारा, फिर बेरहमी से पीटा और अंत में पेट्रोल डालकर आग लगा दी।
दिपु चंद्र दास की हत्या ने भी मचाया था हड़कंप
इससे पहले एक और भयावह मामला दिपु चंद्र दास का सामने आया था, जो एक गारमेंट फैक्ट्री में काम करता था। आरोप है कि एक उग्र भीड़ ने पहले उसे निर्वस्त्र किया, फिर पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी और उसके शव को जला दिया। इन सभी घटनाओं में समानता यह है कि पीड़ित हिंदू समुदाय से थे और हमले बेहद क्रूर तरीके से किए गए।
हिंदू समुदाय में गहराता डर
लगातार हो रही इन घटनाओं के चलते बांग्लादेश के हिंदू समुदाय में गहरी असुरक्षा की भावना फैल गई है। कई परिवारों का कहना है कि वे खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि ऐसे मामलों में अक्सर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, जिससे अपराधियों का हौसला बढ़ता है।
भारत में राजनीतिक प्रतिक्रिया
चंचल भौमिक की हत्या पर भारत में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई ने इस घटना की कड़ी निंदा की और इसे बंगाली हिंदुओं के खिलाफ जारी हिंसा के एक बड़े पैटर्न का हिस्सा बताया। पार्टी नेताओं ने कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा बन चुकी है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस पर ध्यान देना चाहिए।
नरसिंदी में चंचल चंद्र भौमिक की जिंदा जलाकर हत्या ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह दिखाती हैं कि समस्या गहरी है और इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और पीड़ित परिवार को इंसाफ मिल पाता है या नहीं।