विन न्यूज़ नेटवर्क। NEET परीक्षा विवाद और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक द्वारा 26 दिन बाद भूख हड़ताल समाप्त करने के फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए कहा कि अनशन समाप्त करने का तरीका अलग हो सकता था।
राउत का कहना है कि यदि सरकार से बातचीत के बाद अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया गया था, तो यह प्रक्रिया उसी स्थान पर पूरी होनी चाहिए थी जहां से सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाया गया था। उनके अनुसार ऐसा होता तो आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं के बीच एक सकारात्मक संदेश जाता।
‘जंतर-मंतर पर ही खत्म होना चाहिए था अनशन’
संजय राउत ने कहा कि 26 दिनों तक लगातार भूख हड़ताल करना आसान नहीं होता और यह किसी भी व्यक्ति के लिए बड़ी तपस्या के समान है। उन्होंने सोनम वांगचुक के सामाजिक और शैक्षिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनका जीवन देश के लिए महत्वपूर्ण है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि उपवास समाप्त करना ही था तो जंतर-मंतर पर मौजूद आंदोलनकारियों के बीच जाकर इसे समाप्त किया जाना चाहिए था। उनके मुताबिक, इससे आंदोलन से जुड़े हजारों छात्रों को सीधे संबोधित करने का अवसर भी मिलता।
सरकार के रवैये पर उठाए सवाल
शिवसेना (यूबीटी) सांसद ने केंद्र सरकार के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती बरती गई और विरोध प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया गया।
राउत ने कहा कि जिस तरह से प्रदर्शन स्थल से लोगों को हटाया गया, उस पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन करने वालों के साथ संवेदनशील व्यवहार किया जाना चाहिए।
विपक्ष ने आंदोलन को दिया समर्थन
संजय राउत ने दावा किया कि इस आंदोलन को देश के कई विपक्षी दलों का समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए आंदोलन में अपनी भागीदारी दर्ज कराई।
उन्होंने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग केवल किसी एक दल की नहीं, बल्कि व्यापक जनहित का मुद्दा बन चुकी है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की दोहराई मांग
राउत ने एक बार फिर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। उनका कहना था कि यदि परीक्षा प्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं तो जवाबदेही तय होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन कर रहे कई छात्र अब भी अपनी मांगों पर कायम हैं और उनका कहना है कि जब तक ठोस निर्णय नहीं होगा, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
‘यह किसी एक व्यक्ति का आंदोलन नहीं’
संजय राउत ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, देशभर के छात्र और युवा परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता की मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आंदोलन की ताकत उसकी सामूहिक भागीदारी में है और इसे केवल किसी एक चेहरे से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि आंदोलन में शामिल हर छात्र अपनी बात रखने का अधिकार रखता है और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को आगे बढ़ा सकता है।
आगे क्या होगा?
सोनम वांगचुक द्वारा अनशन समाप्त किए जाने के बाद भी कई छात्र संगठन और आंदोलन से जुड़े समूह अपनी मांगों पर कायम हैं। वहीं दूसरी ओर, इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होती जा रही है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों की मांगों को लेकर आगे क्या कदम उठाती है। साथ ही आंदोलन का अगला चरण किस दिशा में आगे बढ़ता है, यह भी आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।