पुणे: देश की रक्षा में अपने प्राणों को जोखिम में डालने वाले कारगिल युद्ध के पूर्व सैनिक हकीमुद्दीन शेख को आज अपने ही वजूद के लिए सबूत देने की नौबत आ गई है। शनिवार रात पुणे के कस्बा पेठ इलाके में स्थित उनके निवास पर कुछ लोगों के साथ पुलिस पहुंची और नागरिकता का प्रमाण दिखाने की मांग की।
परिवार वालों के अनुसार, पुलिसकर्मियों के साथ पहुंचे कुछ अज्ञात लोगों ने बेहद आपत्तिजनक भाषा में बात की और कहा कि अगर उन्होंने उचित दस्तावेज नहीं दिखाए, तो उन्हें बांग्लादेशी या रोहिंग्या मुसलमान घोषित कर दिया जाएगा। यह सुनकर परिवार स्तब्ध रह गया।
“मैंने देश के लिए खून बहाया, अब ये कैसा सवाल?” – हकीमुद्दीन शेख
72 वर्षीय हकीमुद्दीन शेख ने कारगिल युद्ध में फ्रंट लाइन पर सेवा दी थी। उन्हें कई गैलेंट्री अवॉर्ड्स और एक विशेष सेवा पदक भी मिला है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा: “मैंने भारत मां के लिए गोलियां झेली हैं। आज मुझसे कोई यह पूछे कि मैं इस देश का नागरिक हूं या नहीं – इससे बड़ी बेइज्जती मेरे लिए और क्या होगी?”
परिवार का आरोप – जानबूझकर टारगेट किया गया
हकीमुद्दीन शेख की बहू और बेटों ने बताया कि वे पूरी तरह से दस्तावेजों से लैस हैं – राशन कार्ड, वोटर ID, आधार, सेवा रिकॉर्ड – हर प्रमाण मौजूद है। परिजनों का आरोप है कि यह छापेमारी कोई संयोग नहीं, बल्कि एक जानबूझकर की गई साजिश है जो मुसलमानों को डराने के लिए रची जा रही है।
पुलिस का पक्ष – “केवल सूचना पर कार्रवाई की”
पुणे पुलिस ने इस कार्रवाई को रूटीन वेरिफिकेशन ड्राइव करार दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें सूचना मिली थी कि इलाके में कुछ अवैध प्रवासी छिपे हो सकते हैं। हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि रिटायर्ड सैनिक के घर ही क्यों छापा मारा गया, तो वे कोई ठोस जवाब नहीं दे सके। स्थानीय पुलिस अधिकारी ने मीडिया को दिए बयान में कहा: “हमें सूचना मिली थी, उस पर हमने कार्रवाई की। अगर कोई असुविधा हुई है तो जांच की जाएगी।”
सामाजिक संगठनों और रिटायर्ड फौजियों का विरोध
घटना के बाद कई रिटायर्ड मिलिट्री वेटरन्स, मानवाधिकार संगठनों, और स्थानीय नागरिकों ने इस छापेमारी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पूर्व सैनिक संघ के प्रवक्ता ने तीखा बयान जारी करते हुए कहा: हमारा खून सीमा पर बहता है, और हमारे ही घरों में संदेह की नज़र से देखा जाता है? यह भारत की आत्मा के खिलाफ है।
सोशल मीडिया पर मचा बवाल
घटना की ख़बर वायरल होने के बाद ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर नागरिकों ने गुस्सा जाहिर किया।
हैशटैग्स #JusticeForHakimuddin और #KargilHeroInsulted ट्रेंड कर रहे हैं।