प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार 18 मार्च यानि आज को राज्यसभा के उन सांसदों के सम्मान में विदाई भाषण दिया, जिनका कार्यकाल पूरा हो रहा है। इस दौरान उन्होंने सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं की भी सराहना की और उनके लंबे संसदीय अनुभव को लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया।
पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवगौड़ा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और वरिष्ठ नेता शरद पवार जैसे नेताओं का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इनकी आधी से अधिक जिंदगी संसदीय व्यवस्था को समर्पित रही है। उन्होंने कहा कि नए जनप्रतिनिधियों को ऐसे अनुभवी नेताओं से सीखना चाहिए और समाज के प्रति मिली जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाना चाहिए।
राज्यसभा में अपने धन्यवाद संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि लंबा संसदीय कार्यकाल अपने आप में बड़ी उपलब्धि है और देश को इन नेताओं के योगदान पर गर्व है। उन्होंने उपसभापति हरिवंश के कार्य की भी सराहना की और उनके शांत तथा संतुलित संचालन की प्रशंसा की।
राज्यसभा के चेयरमैन सी. पी. राधाकृष्णन ने भी जानकारी दी कि 25 राज्यों के कुल 59 सदस्य, जिनमें देवगौड़ा, खरगे और हरिवंश जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं, अपना कार्यकाल पूरा कर रहे हैं।
वहीं, विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने भी अपने संबोधन में भावुक होते हुए कहा कि राजनीति में कोई व्यक्ति वास्तव में रिटायर नहीं होता, बल्कि अनुभव के साथ काम करता रहता है। उन्होंने अपने 54 वर्षों के संसदीय जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि इतने लंबे समय के बाद भी सीखने की प्रक्रिया जारी रहती है।
खरगे ने सदन के माहौल को बेहतर बनाने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि सहयोग से काम करने पर ही लोकतंत्र मजबूत होता है। उन्होंने हल्के अंदाज में देवगौड़ा और अन्य नेताओं का जिक्र करते हुए माहौल को भावुक होने के साथ-साथ सहज भी बनाया।
यह विदाई समारोह राज्यसभा के वरिष्ठ सदस्यों के योगदान को सम्मान देने और संसदीय परंपराओं को याद करने का एक महत्वपूर्ण अवसर बन गया।