24 मार्च को राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बीच भारत की रणनीति स्पष्ट की। ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष ने ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। पीएम ने खाड़ी में फंसे करोड़ों भारतीयों की सुरक्षा, तेल-गैस आपूर्ति और कूटनीतिक प्रयासों की जानकारी दी।
युद्ध से ऊर्जा संकट, व्यापार ठप
पीएम ने कहा कि यह संघर्ष भारत के लिए अभूतपूर्व चुनौतियां लेकर आया है। होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट से कच्चा तेल, गैस और उर्वरक आपूर्ति प्रभावित हुई है। खाड़ी देशों में 1 करोड़ से अधिक भारतीय कार्यरत हैं, उनकी सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। व्यापारिक मार्ग अवरुद्ध होने से अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।
होर्मुज खोलने के लिए कूटनीतिक दबाव
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत ने ईरान, अमेरिका और इजरायल से होर्मुज स्ट्रेट तत्काल खोलने की मांग की है। “कमर्शियल जहाजों पर हमले और होर्मुज में बाधा अस्वीकार्य है।” एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का भी भारत ने विरोध किया। युद्ध शुरू होने के बाद कई देशों से तेल और LPG से लदे जहाज भारत पहुंचे। आने वाले दिनों में आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास तेज हैं।
3.75 लाख भारतीय सुरक्षित repatriate
पीएम ने जानकारी दी कि संघर्ष शुरू होने से अब तक 3.75 लाख भारतीय सुरक्षित वापस लौट चुके हैं। ईरान से 1000+ भारतीयों को निकाला गया, जिनमें 700 मेडिकल छात्र शामिल हैं। पश्चिम एशिया के अधिकांश देशों के साथ दो दौर की उच्चस्तरीय बातचीत हो चुकी है। सभी पक्षों ने भारतीयों की सुरक्षा का भरोसा दिलाया है।
शांति के लिए संवाद ही समाधान
“युद्ध किसी का भला नहीं करता। भारत का निरंतर प्रयास सभी पक्षों को शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रेरित करना है।” पीएम ने संवाद को एकमात्र रास्ता बताया। खाड़ी देशों ने भारत के सहयोग की सराहना की है। कुछ हमलों में भारतीयों की मौत और घायल होने की घटनाएं हुईं, जिनका इलाज जारी है।
सरकार की सतर्क रणनीति
प्रधानमंत्री ने कहा कि संकटकाल में सरकार सतर्कता और संवेदनशीलता से कार्यरत है। ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ाया गया। रिफाइनरियों में स्टॉक पर्याप्त है। खाड़ी में फंसे हर भारतीय की सुरक्षित वापसी प्राथमिकता है।
वैश्विक भूमिका में भारत
पीएम मोदी ने भारत को शांति दूत के रूप में स्थापित करने की बात कही। अमेरिका, ईरान और इजरायल तीनों के साथ संतुलित कूटनीति से भारत ने अपनी विश्वसनीयता साबित की। होर्मुज संकट से वैश्विक तेल बाजार प्रभावित है, लेकिन भारत ने आपूर्ति शृंखला बनाए रखी।
मिडिल ईस्ट युद्ध लंबा खिंच सकता है। भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता तेज करनी होगी। खाड़ी में भारतीय डायस्पोरा की सुरक्षा के लिए कूटनीति जारी रहेगी। पीएम ने भरोसा दिलाया कि कोई भी भारतीय अकेला नहीं छूटेगा।