विन न्यूज़ नेटवर्क। देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच छात्र संगठन AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा के एक बयान ने नया सियासी विवाद खड़ा कर दिया है। बांग्लादेश के Gen-Z आंदोलन की तारीफ करते हुए नेहा ने कहा कि वहां के आंदोलन ने भारत के युवाओं को रास्ता दिखाया है। उनके इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
बीजेपी ने नेहा बोरा के साथ कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी निशाने पर लेते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष का उद्देश्य लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के बजाय सत्ता परिवर्तन की कोशिश करना है। हालांकि, बीजेपी के ये आरोप हैं और इन्हें किसी साबित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
बांग्लादेश के Gen-Z आंदोलन को लेकर क्या बोलीं नेहा बोरा?
नेहा बोरा ने 14 अक्टूबर को बांग्लादेश के छात्र संगठन सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट के छठे राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए जारी वीडियो संदेश में वहां के Gen-Z आंदोलन का जिक्र किया। उन्होंने बांग्लादेश के युवाओं के आंदोलन की तारीफ करते हुए कहा कि भारत में दिखाई दे रहा Gen-Z आंदोलन भी लोकतंत्र और मतदान के अधिकारों की लड़ाई से जुड़ा है।
नेहा ने बांग्लादेश के छात्र संगठन के प्रति एकजुटता जताते हुए कहा कि वहां के युवाओं ने भारत के नौजवानों को रास्ता दिखाया है। उन्होंने दोनों देशों के छात्रों और कार्यकर्ताओं के बीच सहयोग की उम्मीद भी जताई। उनके इसी बयान को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
राहुल गांधी पर भी बीजेपी ने साधा निशाना
नेहा बोरा हाल के दिनों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रही हैं। राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं के साथ उनकी मौजूदगी को लेकर भी चर्चा हुई थी। अब बीजेपी ने उनके बयान को कांग्रेस की राजनीति से जोड़ते हुए राहुल गांधी पर सवाल उठाए हैं।
बीजेपी का कहना है कि राहुल गांधी और नेहा बोरा की राजनीतिक सोच एक जैसी है। पार्टी ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश के आंदोलन का उदाहरण देकर भारत में भी वैसी ही परिस्थितियां पैदा करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, नेहा के बयान में लोकतंत्र और मताधिकार के लिए युवाओं के आंदोलन से प्रेरणा लेने की बात कही गई है।
प्रदीप भंडारी बोले- राजनीतिक विरोध नहीं, सत्ता परिवर्तन की कोशिश
बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने नेहा बोरा के बयान को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लोकतांत्रिक तरीकों से राजनीतिक विरोध करने के बजाय सत्ता परिवर्तन की दिशा में काम कर रहा है।
भंडारी ने सोशल मीडिया पर नेहा के बयान का हवाला देते हुए इसे सत्ता परिवर्तन की मंशा का खुला संकेत बताया। उन्होंने दावा किया कि इस तरह की सोच भारतीय संविधान और लोकतंत्र के लिए खतरा है। बीजेपी ने इस पूरे विवाद को कांग्रेस और विपक्ष की राजनीति से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं।
SIR विवाद के बीच क्यों बढ़ी राजनीतिक गर्मी?
दरअसल, SIR को लेकर विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं, जबकि चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों पर राजनीतिक बहस जारी है।
ऐसे माहौल में नेहा बोरा का बांग्लादेश के Gen-Z आंदोलन का उल्लेख राजनीतिक टकराव का नया मुद्दा बन गया है। बीजेपी इसे सत्ता परिवर्तन की मंशा से जोड़ रही है, जबकि नेहा के बयान में लोकतंत्र और मतदान के अधिकारों के लिए युवाओं के संघर्ष का समर्थन सामने आया है। फिलहाल, इस बयान को लेकर बीजेपी और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।