मुंबई से थाईलैंड के क्राबी जा रही इंडिगो की एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान बुधवार को उस समय सुर्खियों में आ गई, जब करीब नौ घंटे की लंबी देरी के बाद दो यात्रियों को अनुशासनहीन व्यवहार के चलते विमान से उतारकर सुरक्षा एजेंसियों के हवाले करना पड़ा। यह फ्लाइट कई तकनीकी और परिचालन कारणों से लगातार टलती रही, जिससे यात्रियों में गुस्सा और असंतोष बढ़ता चला गया और अंततः स्थिति तनावपूर्ण हो गई। घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तेजी से वायरल हुए, जिनमें कुछ यात्री केबिन क्रू के साथ बदसलूकी करते और चिल्लाते हुए नजर आए, जबकि एक पुरुष यात्री को कथित तौर पर कॉकपिट के दरवाजे पर लात मारते हुए भी देखा गया।
जानकारी के मुताबिक, इंडिगो की यह फ्लाइट सुबह 4:05 बजे मुंबई से रवाना होने वाली थी, लेकिन यह तय समय पर उड़ान नहीं भर सकी। देरी की शुरुआत उस समय हुई जब विमान का इनकमिंग सेक्टर, जो पश्चिम एशिया से आ रहा था, निर्धारित समय से काफी देर से मुंबई पहुंचा। एक वरिष्ठ मुंबई एयरपोर्ट अधिकारी ने बताया कि विमान के देर से पहुंचने के कारण आगे की उड़ान प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि जब इनकमिंग विमान आखिरकार मुंबई पहुंचा, तब तक उसे ऑपरेट करने वाले कॉकपिट क्रू की फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन यानी एफडीटीएल समाप्त हो चुकी थी। नागरिक उड्डयन नियमों के तहत किसी भी पायलट या क्रू सदस्य को तय समय से अधिक ड्यूटी करने की अनुमति नहीं होती, ताकि उड़ान की सुरक्षा से कोई समझौता न हो। इसी वजह से नए क्रू की व्यवस्था करनी पड़ी, जिससे देरी और बढ़ गई।
इसके बाद हालात तब और बिगड़ गए जब एयर ट्रैफिक कंजेशन के कारण विमान को उड़ान भरने की मंजूरी मिलने में अतिरिक्त समय लगा। अधिकारी के अनुसार, इन सभी कारणों के चलते फ्लाइट आखिरकार दोपहर करीब 1 बजे उड़ान भर सकी, यानी निर्धारित समय से लगभग नौ घंटे बाद। इस लंबे इंतजार के दौरान विमान में बैठे यात्रियों का धैर्य जवाब देने लगा। कई यात्रियों ने आरोप लगाया कि उन्हें उड़ान के नए समय के बारे में सही और नियमित जानकारी नहीं दी जा रही थी, जिससे भ्रम और नाराजगी बढ़ती गई।
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कुछ यात्री केबिन क्रू पर चिल्ला रहे हैं और अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। बताया गया कि एक यात्री ने गुस्से में कॉकपिट के दरवाजे पर लात मार दी, जिसे सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है। ऐसे व्यवहार को देखते हुए एयरलाइन और एयरपोर्ट अधिकारियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया। इंडिगो के अनुसार, दो यात्रियों का आचरण तय मानकों के खिलाफ पाया गया और उन्हें ‘अनरूली पैसेंजर’ घोषित किया गया। मानक प्रक्रिया के तहत दोनों को विमान से उतार दिया गया और आगे की कार्रवाई के लिए सुरक्षा एजेंसियों को सौंप दिया गया।
इंडिगो ने इस पूरे मामले पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि फ्लाइट में देरी कई कारणों के संयुक्त प्रभाव से हुई, जिनमें इनकमिंग विमान का देर से पहुंचना, एयर ट्रैफिक कंजेशन और क्रू का एफडीटीएल सीमा पार करना शामिल है। एयरलाइन ने बताया कि इंतजार के दौरान दो यात्रियों ने अनुचित व्यवहार किया, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। कंपनी ने कहा कि यात्रियों और क्रू की सुरक्षा सर्वोपरि है और इस तरह के मामलों में तय प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाता है।
एयरलाइन ने यह भी स्पष्ट किया कि लंबे इंतजार के दौरान यात्रियों को असुविधा कम करने के लिए कई बार भोजन और रिफ्रेशमेंट उपलब्ध कराए गए। इंडिगो के एयरपोर्ट स्टाफ लगातार यात्रियों की सहायता के लिए मौजूद रहे और स्थिति को संभालने की कोशिश की गई। बयान में कहा गया, “हम सभी यात्रियों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इस देरी से हुई असुविधा के लिए खेद प्रकट करते हैं।”
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो पहले से ही परिचालन चुनौतियों से जूझ रही है। हाल ही में फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन के नए नियम लागू होने के बाद एयरलाइन को क्रू की उपलब्धता को लेकर गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। 1 नवंबर से लागू हुए नए एफडीटीएल नियमों का उद्देश्य उड़ानों को और सुरक्षित बनाना है, लेकिन कम लागत वाली रणनीतियों पर निर्भर कई एयरलाइंस, खासकर इंडिगो, के लिए यह एक बड़ी परीक्षा साबित हुई है। इन नियमों के कारण पर्याप्त संख्या में क्रू न होने से कई उड़ानें रद्द या विलंबित हुईं, जिससे हजारों यात्री अलग-अलग एयरपोर्ट्स पर फंसे रह गए थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी देरी के मामलों में यात्रियों की नाराजगी बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन विमानन सुरक्षा के लिहाज से किसी भी तरह का हिंसक या अनुशासनहीन व्यवहार बेहद गंभीर माना जाता है। कॉकपिट या क्रू के साथ बदसलूकी न केवल यात्रियों की अपनी सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है, बल्कि अन्य यात्रियों और उड़ान संचालन के लिए भी जोखिम पैदा करती है। यही कारण है कि एयरलाइंस ऐसे मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाती हैं।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि लगातार बढ़ते हवाई यातायात, सख्त सुरक्षा नियमों और सीमित संसाधनों के बीच एयरलाइंस यात्रियों की अपेक्षाओं और परिचालन वास्तविकताओं के बीच संतुलन कैसे बनाएंगी। यात्रियों की ओर से बेहतर संवाद और समय पर जानकारी की मांग लगातार उठती रही है, वहीं एयरलाइंस का कहना है कि कई बार परिस्थितियां उनके नियंत्रण से बाहर होती हैं। मुंबई-क्राबी इंडिगो फ्लाइट की यह घटना इसी टकराव का ताजा उदाहरण बनकर सामने आई है, जहां देरी, नाराजगी और अनुशासनहीनता ने मिलकर एक गंभीर स्थिति पैदा कर दी।