विन न्यूज़ नेटवर्क। देशभर में NEET परीक्षा को लेकर उठे विवाद और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग अब राजनीतिक रंग भी लेने लगी है। छात्रों के समर्थन में कई राजनीतिक दल खुलकर सामने आ चुके हैं। इसी कड़ी में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने आंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि 25 जुलाई को लखनऊ के ईको गार्डन में होने वाले विरोध प्रदर्शन में वह स्वयं शामिल होंगे और सरकार तक छात्रों की आवाज पहुंचाएंगे।
चंद्रशेखर आजाद ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग का प्रतीक बन चुका है। उनका कहना है कि जब तक छात्रों की मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
ईको गार्डन से सरकार के खिलाफ बुलंद होगी आवाज
आजाद समाज पार्टी ने 25 जुलाई को लखनऊ के ईको गार्डन में बड़े विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। पार्टी का दावा है कि इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र, युवा और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
चंद्रशेखर आजाद ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपील की कि वे अपने-अपने जिलों में भी आंदोलन को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि सभी लोगों का लखनऊ पहुंचना जरूरी नहीं है। जिला मुख्यालयों पर भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर प्रशासन के माध्यम से सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाई जाएं।
देशव्यापी आंदोलन की दी चेतावनी
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि यदि सरकार छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं लेती है तो आंदोलन का दायरा और बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में देशभर में चरणबद्ध तरीके से प्रदर्शन, मार्च और जनजागरण अभियान चलाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़ा यह मुद्दा किसी एक राज्य का नहीं, बल्कि पूरे देश का है। इसलिए सभी युवाओं को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की दोहराई मांग
आजाद समाज पार्टी प्रमुख ने एक बार फिर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। उनका कहना है कि परीक्षा से जुड़े विवादों और छात्रों में पैदा हुए अविश्वास की नैतिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की, जिन पर प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ बल प्रयोग करने के आरोप लगे हैं। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों के साथ कठोर व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सरकार को दिया समय, बड़े आंदोलन के संकेत
चंद्रशेखर आजाद ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि निर्धारित समय के भीतर छात्रों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में विभिन्न राज्यों में बड़े पैमाने पर मार्च, धरना-प्रदर्शन और ‘जेल भरो आंदोलन’ जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि इसके बाद भी समाधान नहीं निकला तो देशव्यापी आंदोलन की रणनीति पर भी विचार किया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जाएगा।
NEET विवाद पर तेज हुई सियासत
NEET परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था को लेकर जारी विवाद अब राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका है। विपक्षी दल लगातार परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठा रहे हैं।
राजनीतिक दलों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं ने लाखों छात्रों का भरोसा कमजोर किया है। ऐसे में सरकार को केवल आश्वासन देने के बजाय ठोस और प्रभावी कदम उठाने होंगे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
इसी बीच छात्रों का आंदोलन भी अलग-अलग राज्यों में जारी है और कई संगठन शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर और अधिक चर्चा का केंद्र बन सकता है।