पंजाब कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के चयन को लेकर नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू द्वारा दिए गए बयान ने पार्टी में खलबली मचा दी है। शनिवार को दिए गए अपने बयान में डॉ. नवजोत ने दावा किया था कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने के लिए 500 करोड़ रुपये की अटैची देना जरूरी होता है।
इस बयान के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने स्पष्ट किया कि पार्टी हाईकमान को इस मामले की जानकारी दे दी गई है। उन्होंने कहा, “हाईकमान को जो निर्णय लेना है, वह उनका अधिकार क्षेत्र है।” उन्होंने नवजोत कौर के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि न किसी ने 500 करोड़ रुपये दिए और न ही ऐसी कोई व्यवस्था है।
वहीं, कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान भाजपा नेता सुनील जाखड़ ने कहा कि पार्टी में मुख्यमंत्री पद के लिए चयन के कई पैमाने हैं। जाखड़ ने याद दिलाया कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद पार्टी की आंतरिक खींचतान के कारण उन्होंने भी अवसर गंवाया था। जाखड़ ने कहा कि उन्हें एक पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया था कि पुण्य के बजाय 350 करोड़ रुपये देकर पद हासिल किया गया था। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वह इस आधार पर किसी के पद प्राप्त करने की पुष्टि नहीं कर रहे हैं।
इसके अलावा, कांग्रेस के पूर्व सांसद जसबीर सिंह डिंपा ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि पंजाब में “डाकू को मुख्यमंत्री पद पर बैठा दिया गया है”, जो पार्टी के भीतर भी विवाद का कारण बना।
इतिहास में देखें तो 2021 में जब कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाया था, उस समय नवजोत सिंह सिद्धू पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष थे। शुरुआत में सिद्धू मुख्यमंत्री पद की दौड़ में नहीं थे, लेकिन बाद में उन्होंने भी दावेदारी की। अंततः चरणजीत सिंह चन्नी को यह मौका मिला और वे 111 दिन तक मुख्यमंत्री रहे।
2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भी सिद्धू और चन्नी के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान जारी रही। इस दौरान सिद्धू ने अपनी लोकप्रियता का हवाला देते हुए राहुल गांधी से कहा था कि उन्हें “दर्शनीय घोड़ा” न बनाया जाए। इसके बावजूद कांग्रेस ने चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया।
नवजोत कौर सिद्धू के ताजा बयान के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में खिन्नता देखने को मिली है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि 2022 में सिद्धू और चन्नी की खींचतान के कारण कांग्रेस को पंजाब में करारी हार का सामना करना पड़ा था। अब इस बयान ने पार्टी के लिए नई चिंताएं पैदा कर दी हैं और हाईकमान पर दबाव बढ़ा है कि वे इस मामले का जल्द समाधान निकालें।