गुजरात के वादीनार पोर्ट पर मंगलवार को एलपीजी टैंकर जहाज ‘नंदा देवी’ पहुंचा। यह जहाज लगभग 46,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर भारत आया है। इससे पहले, एक दिन पहले ही जहाज ‘शिवालिक’ भी लगभग समान मात्रा में गैस लेकर मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंच चुका था। इन दोनों जहाजों ने संवेदनशील समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया, जो पिछले महीने अमेरिका और इजरायल के बीच शुरू हुए संघर्ष के कारण ईरान द्वारा अस्थायी रूप से बंद किया गया था।
होर्मुज जलडमरूमुख फारस की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है। यह मार्ग दुनिया के अधिकांश तेल और गैस व्यापार के लिए अहम माना जाता है। पिछले महीने ईरान द्वारा इस मार्ग को बंद करने और खाड़ी में मिसाइल एवं ड्रोन हमलों के कारण वैश्विक तेल की कीमतों में 40 से 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। इसके साथ ही समुद्री मार्ग से ईंधन की ढुलाई में जोखिम बढ़ गया था और भारत सहित कई देशों में आपूर्ति की स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी।
भारतीय जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने की अनुमति मिलने के बाद चिंता का माहौल कुछ हद तक कम हुआ है। विशेष रूप से, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के स्वामित्व वाले ये दो जहाज-‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’-लगभग 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी भारत ला रहे हैं। बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि जहाजों ने मार्ग को सुरक्षित रूप से पार कर खुला समुद्र प्रवेश किया और इस दौरान किसी भी अप्रिय घटना की रिपोर्ट नहीं मिली। उन्होंने यह भी कहा कि फारस की खाड़ी में कार्यरत सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं।
एलपीजी जहाजों की सुरक्षित आगमन से घरेलू गैस आपूर्ति के लिए राहत की उम्मीद बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य का यह मार्ग न केवल ईंधन की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत के ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू बाजार में एलपीजी की कीमतों पर भी इसका सीधा असर पड़ता है। पिछले हफ्तों में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों को प्रभावित किया था, जिससे भारत सहित कई देशों में ईंधन की महंगाई बढ़ गई थी।
इस मौके पर अधिकारियों ने यह भी बताया कि एलपीजी जहाजों का परिचालन पूरी तरह सुरक्षित तरीके से हुआ। भारत सरकार और शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने यह सुनिश्चित किया कि जहाज मार्ग पर किसी भी खतरनाक स्थिति का सामना न करे। इसके अलावा, बंदरगाह पर माल उतारने और वितरण प्रक्रिया को भी व्यवस्थित तरीके से अंजाम दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में भी होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए ईंधन की ढुलाई रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों और रणनीतिक जहाज संचालन पर विशेष ध्यान दे रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के सुरक्षित पार होने से घरेलू बाजार में एलपीजी की आपूर्ति में सुधार की उम्मीद है और वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतों में अस्थिरता को भी कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
साथ ही, इस घटना से यह संदेश भी गया है कि भारत अपने महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक हितों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है। एलपीजी टैंकरों का सफल आगमन न केवल ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम है, बल्कि घरेलू उद्योग और उपभोक्ताओं के लिए भी राहत देने वाला कदम है।