पटना- बिहार में मतदाता सूची संशोधन (Voter List Revision) को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। जेडीयू (जनता दल यूनाइटेड) के वरिष्ठ सांसद गिरधारी यादव ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं और मतदाता सूची अपडेट की प्रक्रिया को अव्यवहारिक बताया है।
गिरधारी यादव ने कहा कि आयोग जिस तरह से SIR प्रक्रिया (Special Summary Revision) को लागू कर रहा है, वह बिहार जैसे राज्य की जमीनी हकीकत से पूरी तरह कटे हुए निर्णयों का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि “चुनाव आयोग को बिहार के इतिहास और भूगोल का ज्ञान नहीं है।”
प्रवासी मतदाताओं के लिए असहज है यह प्रक्रिया
यादव ने विशेष रूप से प्रवासी नागरिकों की स्थिति को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बिहार के लाखों लोग रोज़गार के लिए देश और विदेश के विभिन्न हिस्सों में रहते हैं, और आयोग द्वारा निर्धारित समयसीमा में वे अपनी प्रविष्टियों को अपडेट नहीं कर सकते।
उन्होंने मांग की कि आयोग को कम से कम छह महीने का समय देना चाहिए था, ताकि प्रवासी मतदाता भी अपना नाम ठीक से जुड़वा सकें और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी कर सकें।
चुनाव आयोग से पुनर्विचार की मांग
गिरधारी यादव ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग को चाहिए कि वह स्थानीय प्रशासन, पंचायतों और जिलों से फीडबैक लेकर प्रक्रिया को सरल बनाए। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य-विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए एक लचीली रणनीति अपनाई जाए।
राजनीतिक मायने
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान सिर्फ प्रशासनिक आलोचना नहीं, बल्कि आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश भी हो सकती है। बिहार में अगले वर्ष संभावित विधानसभा चुनावों को देखते हुए, वोटर लिस्ट संशोधन का मुद्दा राजनीतिक गर्मी का कारण बन सकता है।