विन न्यूज़ नेटवर्क। जयपुर में मुख्यमंत्री के काफिले के दौरान हुई घटना में गंभीर रूप से झुलसी रेशू गुप्ता अब इंसाफ की मांग लेकर राजस्थान राज्य महिला आयोग पहुंची हैं। सोमवार को उन्होंने अपने परिवार, वकील और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ आयोग कार्यालय में शिकायत दर्ज कराते हुए मामले में निष्पक्ष कार्रवाई और आर्थिक सहायता की मांग की।
रेशू गुप्ता ने कहा कि हादसे के बाद सरकार की ओर से कई आश्वासन दिए गए, लेकिन अब तक उन्हें किसी प्रकार की ठोस मदद नहीं मिली है। उनका कहना है कि इलाज पर रोजाना करीब 3 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं और अब परिवार के पास उपचार जारी रखने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं बचे हैं।
डॉक्टरों ने दी लंबी चिकित्सा की सलाह
पीड़िता के अनुसार, डॉक्टरों ने कम से कम 15 दिन तक नियमित ड्रेसिंग कराने को कहा है। इसके बाद उन्हें प्लास्टिक सर्जरी से गुजरना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि हादसे में उनका ठेला भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे रोज़गार बंद हो गया है और परिवार की आय रुक गई है।
कार्रवाई को लेकर जताई नाराजगी
रेशू गुप्ता ने आरोप लगाया कि अब तक मामले में केवल एक कांस्टेबल को लाइन हाजिर किया गया है, जबकि घटना की जिम्मेदारी तय करने के लिए बड़े अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि वह मुख्यमंत्री आवास तक गई थीं, लेकिन भजनलाल शर्मा से मुलाकात नहीं हो सकी।
महिला आयोग से न्याय की उम्मीद
पीड़िता ने कहा कि अब उन्हें उम्मीद है कि महिला आयोग इस मामले में हस्तक्षेप करेगा और उन्हें न्याय दिलाने में मदद करेगा। उन्होंने आयोग से आर्थिक सहायता, उचित चिकित्सा सुविधा और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। रेशू गुप्ता ने इस मामले में योगी आदित्यनाथ से भी हस्तक्षेप करने की अपील की है और कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनकी आवाज सुनी जाएगी।
सरकार मदद करेगी: बीजेपी विधायक
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी विधायक बालमुकुंद आचार्य ने कहा कि सरकार पीड़िता की हरसंभव सहायता करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से जो भी आश्वासन दिया गया है, उसे पूरा किया जाएगा और रेशू गुप्ता को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस पूरे मामले को संवेदनशीलता के साथ देख रही है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
घटना ने उठाए कई सवाल
मुख्यमंत्री के काफिले के दौरान हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि पीड़िता को शीघ्र आर्थिक सहायता और बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाना चाहिए। अब सभी की नजर महिला आयोग की अगली कार्रवाई और राज्य सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हुई है।