विन न्यूज़ नेटवर्क। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। रूस से तेल और गैस खरीदने के मुद्दे पर अमेरिका भारत समेत कई देशों पर कड़े व्यापारिक कदम उठा सकता है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले 10 दिनों के भीतर इस मामले में फैसला ले सकते हैं। प्रस्तावित कदमों के तहत कुछ देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का विकल्प भी शामिल है।
सर्जियो गोर ने गुरुवार को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में यह बात कही। उनके बयान के बाद भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप प्रशासन भारत पर वास्तव में कितना टैरिफ लगाएगा या उसे किसी तरह की छूट मिलेगी।
तेल, गैस और प्रतिबंधों के उल्लंघन पर कार्रवाई का प्रावधान
सर्जियो गोर ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित कार्रवाई केवल रूसी तेल खरीदने तक सीमित नहीं है। इसमें तेल और गैस की खरीद के साथ-साथ प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देशों को भी शामिल किया जा सकता है।
उनके मुताबिक, अमेरिकी कानून राष्ट्रपति को तीन श्रेणियों में कार्रवाई करने का अधिकार देता है। इनमें रूसी तेल की खरीद, रूसी गैस की खरीद और प्रतिबंधों के उल्लंघन से जुड़े मामले शामिल हैं। गोर ने कहा कि भारत इन श्रेणियों में से एक के दायरे में आता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ये प्रावधान किसी एक देश को निशाना बनाने के लिए नहीं हैं।
अगर अमेरिका इस विकल्प का इस्तेमाल करता है, तो भारत के निर्यात कारोबार और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव टैरिफ के दायरे, लागू होने की शर्तों और अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।
ट्रंप प्रशासन के सामने 10 दिन में फैसला लेने की चुनौती
सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति को इस मामले में जल्द फैसला लेना होगा। उनके अनुसार, संबंधित कानून के तहत अब तक किसी देश पर कार्रवाई नहीं की गई है, जबकि निर्णय लेने के लिए निर्धारित समयसीमा का मुद्दा भी सामने है।
गौरतलब है कि अमेरिका की ओर से प्रस्तावित यह कदम रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की व्यापक रणनीति से जुड़ा है। अमेरिका चाहता है कि रूस के साथ ऊर्जा व्यापार करने वाले देशों पर दबाव बनाकर मॉस्को की आर्थिक गतिविधियों को सीमित किया जाए। भारत के लिए यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चा तेल खरीदता है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी नजर
टैरिफ की आशंकाओं के बीच सर्जियो गोर ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत भी दिए। उन्होंने कहा कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं और बातचीत में अच्छी प्रगति हुई है।
गोर के मुताबिक, समझौते से जुड़े बड़े मुद्दों पर काफी काम हो चुका है। हालांकि, कुछ छोटे मुद्दे और बातचीत के दौरान सामने आने वाली नई चिंताएं अभी बाकी हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच बातचीत महत्वपूर्ण रहने वाली है।
यदि व्यापार समझौते पर सहमति बनती है, तो इससे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूती मिल सकती है। लेकिन रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर संभावित अमेरिकी कार्रवाई बातचीत को प्रभावित कर सकती है।
अमेरिकी टैरिफ नीति में कानूनी बदलाव भी अहम
सर्जियो गोर ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी जिक्र किया, जिसमें 6-3 के बहुमत से राष्ट्रपति द्वारा इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ को गैरकानूनी ठहराया गया था। इस फैसले के बाद अमेरिकी प्रशासन को व्यापार समझौते के कुछ हिस्सों पर दोबारा विचार करना पड़ा।
अब सबकी नजर ट्रंप के अगले कदम पर है। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकता है कि अमेरिका भारत पर टैरिफ लगाने का फैसला करता है या व्यापार समझौते के जरिए कोई रास्ता निकालता है। फिलहाल, 100 फीसदी टैरिफ की आशंका बनी हुई है, लेकिन भारत पर इसे लागू किए जाने की कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है।