ट्रंप पर भड़के ईरानी सुप्रीम लीडर बोले- ‘अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की कोई कीमत नहीं’

Vin News Network
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ट्रंप पर भड़के ईरानी सुप्रीम लीडर

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के रिश्तों में एक बार फिर तल्खी बढ़ गई है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह मुज्तबा खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अमेरिका द्वारा समझौतों का बार-बार उल्लंघन यह साबित करता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की कोई विश्वसनीयता नहीं रह गई है। उन्होंने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) का सम्मान नहीं किया गया, जिससे अमेरिका की प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

खामेनेई ने X पर दिया कड़ा संदेश

शनिवार, 18 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए अपने संदेश में खामेनेई ने कहा कि अमेरिका की ओर से समझौतों को लगातार तोड़ा जाना यह दिखाता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की कोई वास्तविक अहमियत नहीं है। उनके अनुसार, बार-बार वादाखिलाफी से अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।

जॉर्डन में हमलों पर सेंटकॉम का बयान

इस बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने भी जॉर्डन में हुए हालिया हमलों को लेकर आधिकारिक जानकारी साझा की है। सेंटकॉम के अनुसार, 17 जुलाई को जॉर्डन में ईरान की ओर से किए गए बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों के खिलाफ रक्षा अभियान के दौरान दो अमेरिकी सैन्यकर्मी मारे गए, जबकि एक सैनिक अब भी लापता है। इसके अलावा चार घायल सैनिकों का अस्पताल में इलाज किया गया और स्वस्थ होने के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। मामूली रूप से घायल अन्य सैनिक अपनी ड्यूटी पर लौट चुके हैं।

शहीद सैनिकों की पहचान फिलहाल सार्वजनिक नहीं

सेंटकॉम ने अपने बयान में कहा कि शहीद और लापता सैनिकों के परिवारों की गोपनीयता और सम्मान को ध्यान में रखते हुए उनके नाम और अन्य व्यक्तिगत जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं की जाएगी। आधिकारिक सूचना परिवारों तक पहुंचने और निर्धारित समय पूरा होने के बाद ही उनकी पहचान जारी की जाएगी।

पश्चिम एशिया में बढ़ रहा तनाव

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर पूरे पश्चिम एशिया में देखने को मिल रहा है। दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ रही सैन्य गतिविधियां और तीखे बयान क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए नई चुनौती बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास तेज नहीं हुए तो आने वाले दिनों में हालात और अधिक गंभीर हो सकते हैं।

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