भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) आज से आधिकारिक तौर पर लागू हो गया है। इस समझौते के साथ दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए आयात और निर्यात पर लगने वाले कई शुल्कों (टैरिफ) में बड़ी कटौती की गई है। इसका सीधा फायदा भारतीय उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों को मिलने की उम्मीद है।
इस समझौते का सबसे बड़ा असर ब्रिटेन से भारत आने वाले उत्पादों की कीमतों पर दिखाई देगा। खासतौर पर स्कॉच व्हिस्की, जिन और अन्य ब्रिटिश शराब पर लगने वाली 150 प्रतिशत आयात शुल्क को चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा। शुरुआती स्तर पर इसे 75 प्रतिशत तक घटाया गया है और आगे चलकर इसे 40 प्रतिशत तक लाने की योजना है। इससे भारतीय बाजार में ब्रिटिश व्हिस्की पहले की तुलना में काफी सस्ती हो सकती है।
भारत-यूके एफटीए का लाभ केवल पेय पदार्थों तक सीमित नहीं रहेगा। जगुआर लैंड रोवर, रोल्स-रॉयस और बेंटले जैसी ब्रिटिश लग्जरी कारों पर भी आयात शुल्क में बड़ी कटौती की गई है। कोटा प्रणाली के तहत पहले वर्ष सीमित संख्या में आयात होने वाली इन कारों पर ड्यूटी 100 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दी गई है। इससे प्रीमियम कारों की कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना जताई जा रही है।
ब्रिटेन से आने वाले ब्यूटी और कॉस्मेटिक उत्पादों पर भी टैरिफ 15 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अलावा ब्रिटिश चॉकलेट, बिस्किट, सॉफ्ट ड्रिंक, सैल्मन फिश और अन्य कई आयातित खाद्य उत्पाद भी पहले की तुलना में सस्ते हो सकते हैं।
इस समझौते का बड़ा फायदा भारत को भी मिलेगा। एफटीए के तहत भारत से ब्रिटेन जाने वाले लगभग 99 प्रतिशत उत्पाद अब बिना किसी आयात शुल्क के ब्रिटेन के बाजार में प्रवेश कर सकेंगे। इससे भारतीय टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट्स, फुटवियर, लेदर उत्पाद, खाद्य सामग्री, रत्न एवं आभूषण, समुद्री उत्पाद और रसायन उद्योग को निर्यात बढ़ाने का बड़ा अवसर मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई मजबूती देगा। इससे भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, निर्यात में तेजी आएगी और दोनों देशों के उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद अधिक किफायती कीमत पर उपलब्ध हो सकेंगे।