मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच भारत और रूस ने अपने रक्षा सहयोग को और मजबूत करते हुए RELOS (Reciprocal Exchange of Logistics Support) समझौते की नई जानकारी साझा की है। इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे के क्षेत्रों में सैनिक, युद्धपोत और सैन्य विमान तैनात कर सकेंगे। मॉस्को द्वारा सार्वजनिक की गई जानकारी के अनुसार, इस डील को 2026 से लागू माना जा रहा है और इसे दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों में बड़ा कदम बताया जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समझौते के तहत भारत और रूस अधिकतम 3000 सैनिक, 5 युद्धपोत और 10 सैन्य विमान तक एक-दूसरे के क्षेत्रों में तैनात कर सकते हैं। इससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल, लॉजिस्टिक सपोर्ट और संयुक्त ऑपरेशनल क्षमता में बढ़ोतरी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे साइबर युद्ध, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और उन्नत रक्षा तकनीकों में भी सहयोग बढ़ेगा।
यह डील रूस को हिंद महासागर क्षेत्र तक पहुंच देती है, जबकि भारत को आर्कटिक और प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी मजबूत करने का अवसर मिलता है। साथ ही, भारत के लिए यह समझौता इसलिए भी अहम है क्योंकि उसके अधिकांश सैन्य उपकरण रूसी मूल के हैं, जिससे रखरखाव और ऑपरेशन में आसानी होगी।
कुल मिलाकर, RELOS समझौता भारत और रूस के बीच रक्षा संबंधों को नई ऊंचाई देता है और बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरणों में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।