हाल ही में एक विदेशी उपग्रह द्वारा इसरो के सैटेलाइट के बेहद करीब आने की घटना ने भारत को अंतरिक्ष में सुरक्षा को लेकर सजग कर दिया है। अब केंद्र सरकार ऐसे कदम उठाने जा रही है जिससे भविष्य में भारतीय उपग्रहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसके तहत भारत 50 विशेष निगरानी उपग्रह अंतरिक्ष में भेजने की योजना पर काम कर रहा है जिन्हें ‘बॉडीगार्ड सैटेलाइट्स’ कहा जा रहा है।
दुश्मन की संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर
सूत्रों के अनुसार, 2024 के मध्य में एक पड़ोसी देश का उपग्रह इसरो के एक महत्वपूर्ण निगरानी सैटेलाइट के सिर्फ 1 किलोमीटर के भीतर आ गया था। यह उपग्रह न केवल मानचित्रण बल्कि रक्षा निगरानी के काम में भी इस्तेमाल हो रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ संयोग नहीं बल्कि रणनीतिक शक्ति प्रदर्शन था।
27 हजार करोड़ की सुरक्षा परियोजना
सरकार की योजना के तहत 27,000 करोड़ रुपये की लागत से 50 निगरानी उपग्रह अंतरिक्ष में तैनात किए जाएंगे। पहला उपग्रह 2026 की शुरुआत तक लॉन्च किया जा सकता है। ये उपग्रह भारतीय सैटेलाइट्स के आसपास रहकर उन्हें संभावित खतरों से बचाएंगे और किसी भी संदिग्ध हरकत की तुरंत सूचना देंगे।
चीन की बढ़ती अंतरिक्ष गतिविधियों से बढ़ी चिंता
भारत के सुरक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से चीन की आक्रामक अंतरिक्ष रणनीतियों को लेकर चिंता जता रहे हैं। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने हाल के वर्षों में अंतरिक्ष में अपनी मौजूदगी कई गुना बढ़ा दी है। चीन के पास फिलहाल 930 से अधिक सक्रिय उपग्रह हैं जबकि भारत के पास सौ से कुछ अधिक उपग्रह हैं। पाकिस्तान इस दौड़ में काफी पीछे है उसके पास केवल आठ उपग्रह हैं।
स्टार्टअप्स से मिल रही तकनीकी मदद
सरकार अब अंतरिक्ष तकनीक से जुड़े स्टार्टअप्स की मदद ले रही है। उद्देश्य है ऐसे स्मार्ट समाधान विकसित करना जो संभावित खतरे की पहचान पहले ही कर सकें। ‘लिडार’ जैसी तकनीकों पर काम हो रहा है जिससे खतरे की पहचान कर सैटेलाइट को नई दिशा में भेजा जा सके। इसरो के पूर्व अधिकारी सुधीर कुमार का कहना है कि भारत को अंतरिक्ष में 24×7 निगरानी रखने के लिए ज़मीन पर रडार और टेलीस्कोप के नेटवर्क की भी ज़रूरत होगी। वर्तमान में भारत के पास यह क्षमता सीमित है लेकिन स्टार्टअप्स इसे विकसित करने में जुटे हैं।
भारत-पाक संघर्ष में इसरो की भूमिका
इस साल मई में भारत-पाकिस्तान सीमा पर हुए तनाव के दौरान इसरो ने अहम भूमिका निभाई थी। इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने बताया कि उस दौरान 400 से अधिक वैज्ञानिकों की टीम ने उपग्रहों की गतिविधियों को सक्रिय और सटीक बनाए रखने में जी-जान लगा दी थी जिससे सेना को रियल-टाइम इंटेलिजेंस मिलती रही।
नतीजा
अंतरिक्ष अब केवल अनुसंधान का क्षेत्र नहीं रहा यह राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अहम आयाम बन चुका है। भारत की ‘बॉडीगार्ड सैटेलाइट्स योजना’ न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भारत की रणनीतिक सोच और अंतरिक्ष में उसकी सतर्कता को भी दर्शाता है।