हरदोई में परिवार की तरह रखे गए नौकर ही निकले मास्टरमाइंड के मोहरे, नींद की गोलियां खिलाकर उड़ाए करोड़ों रुपये

Vin News Network
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पुलिस ने 14 आरोपियों को भेजा जेल

विन न्यूज़ नेटवर्क। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में करोड़ों रुपये की चोरी के मामले का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। यह सिर्फ चोरी की वारदात नहीं, बल्कि उस भरोसे के टूटने की कहानी है, जिसे एक कारोबारी परिवार ने सात वर्षों तक अपने घर में रहने वाले नौकरों पर किया था। जिस परिवार ने नौकरों को अपने सदस्यों की तरह रखा, उन्हीं लोगों ने बाहर के साथियों के साथ मिलकर करोड़ों रुपये की चोरी की ऐसी साजिश रची कि पूरा परिवार रातभर सोता रह गया और सुबह तिजोरी खाली मिली।

पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में दो किशोरों समेत कुल 16 लोगों को पकड़ा है। इनमें से 14 वयस्क आरोपियों को जेल भेज दिया गया है, जबकि दोनों किशोरों को बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ₹1 करोड़ 28 लाख 99 हजार 310 रुपये भी बरामद किए हैं।

एक बातचीत से जन्मी करोड़ों की चोरी की साजिश

पुलिस जांच में सामने आया कि इस पूरे षड्यंत्र का मास्टरमाइंड अजय शुक्ला था। उसकी बहन का पति पहले व्यापारी पंकज अग्रवाल के यहां मुनीम का काम करता था। घर लौटने में अक्सर देर होने पर उसने परिवार को बताया था कि व्यापारी के यहां देर रात तक करोड़ों रुपये की गिनती और हिसाब-किताब होता है।

यहीं से अजय के मन में यह बात बैठ गई कि कारोबारी के घर में हमेशा भारी मात्रा में नकदी रहती है। उसने धीरे-धीरे इस जानकारी को चोरी की योजना में बदल दिया और ऐसे लोगों की तलाश शुरू की जो इस वारदात को अंजाम दे सकें।

घर के नौकर ही बने सबसे बड़े गुनहगार

इस पूरी वारदात में सबसे अहम भूमिका उन तीन नौकरों की रही, जो पिछले सात वर्षों से पंकज अग्रवाल के घर में रह रहे थे। परिवार उन्हें नौकर नहीं, बल्कि अपने सदस्यों की तरह मानता था। घर की अलमारियां, नकदी रखने की जगह, चाबियों का स्थान और परिवार की दिनचर्या—हर बात की जानकारी इन्हीं लोगों को थी।

इसी भरोसे का फायदा उठाते हुए उन्होंने बाहर के आरोपियों को पूरी जानकारी दी और चोरी की पूरी स्क्रिप्ट तैयार कर डाली।

नींद की गोलियां खिलाईं, तकिए के नीचे से निकाली चाबी

पुलिस के मुताबिक, 16 जुलाई की रात आरोपियों ने बेहद शातिर तरीके से वारदात को अंजाम दिया। परिवार के भोजन में कथित तौर पर नींद की गोलियां मिला दी गईं, जिससे सभी सदस्य गहरी नींद में सो गए।

इसके बाद नौकरों ने व्यापारी के तकिए के नीचे रखी अलमारी की चाबी निकाली और तिजोरी खोल दी। नकदी से भरे बैग एक-एक कर घर के बाहर पहुंचाए गए, जहां पहले से मौजूद साथी उन्हें आगे बढ़ाते रहे। आखिर में पूरी रकम एक पिकअप वाहन में लादकर सभी आरोपी मौके से फरार हो गए।

सुबह जब परिवार की आंख खुली तो घर में रहने वाले तीनों नौकर गायब थे और उनके साथ नकदी से भरे आठ बैग भी लापता थे।

महंगे शौक और जल्द अमीर बनने की चाह बनी अपराध की वजह

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने चोरी के पीछे की जो वजह बताई, वह भी चौंकाने वाली रही। किसी का सपना विदेश घूमने का था, कोई नई बाइक खरीदना चाहता था तो कोई रातों-रात करोड़पति बनने की चाह रखता था।

पुलिस के अनुसार, इन्हीं महंगे शौक और जल्दी पैसा कमाने की लालसा ने पूरे गिरोह को अपराध की राह पर धकेल दिया। लालच इतना बढ़ गया कि वर्षों का विश्वास और रिश्तों की अहमियत भी उनके लिए मायने नहीं रखी।

पुलिस ने ऐसे खोला करोड़ों की चोरी का राज

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा के निर्देश पर कई टीमें गठित की गईं। सीओ सिटी अजीत चौहान के नेतृत्व में पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, स्थानीय सूचनाओं और आरोपियों की गतिविधियों के आधार पर जांच शुरू की।

लगातार छापेमारी और पूछताछ के बाद पुलिस ने पूरे गिरोह का पर्दाफाश कर दिया। कार्रवाई के दौरान ₹1.28 करोड़ से अधिक की नकदी बरामद की गई और वारदात में शामिल सभी प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

16 लोग पकड़े गए, 14 पहुंचे जेल

पुलिस ने इस मामले में कुल 16 लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें दो किशोर भी शामिल हैं। 14 वयस्क आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है, जबकि दोनों नाबालिगों को बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

हरदोई की यह घटना सिर्फ करोड़ों रुपये की चोरी नहीं, बल्कि विश्वास टूटने की ऐसी कहानी बन गई जिसने हर किसी को झकझोर दिया। जिस परिवार ने सात साल तक अपने कर्मचारियों को परिवार का हिस्सा मानकर घर में रखा, उन्हीं लोगों ने लालच में आकर उसी घर की तिजोरी खाली कर दी।

हालांकि, महंगे शौक पूरे होने से पहले ही पूरा गिरोह पुलिस के शिकंजे में आ गया। यह मामला एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि अपराध चाहे कितनी भी शातिर योजना से क्यों न किया जाए, कानून के हाथ आखिरकार अपराधियों तक पहुंच ही जाते हैं।

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