पिछले सप्ताह कोलकाता में भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में फिर एक हाई-ड्रामा देखने को मिला, जब एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) की टीम ने आई-पैक (Indian Political Action Committee) पर छापेमारी की। आई-पैक, जो पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए राजनीतिक सलाहकार के रूप में कार्य करता है, और उसके आईटी व मीडिया विभाग की जांच में ED ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले के संबंध में दस्तावेजों और डिजिटल डाटा को जब्त करने का प्रयास किया।
इस पूरे घटनाक्रम में ED ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की “चौंकाने वाली आदत” रही है कि वह किसी भी सरकारी या संवैधानिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करती रहती हैं। ED ने यह दलील दी कि ममता ने पिछले कई अवसरों पर, जब संवैधानिक संस्थाएं अपनी शक्तियों का प्रयोग कर रही थीं, तो वहां बिना अनुमति दाखिल होकर हस्तक्षेप किया।
सुप्रीम कोर्ट में ED की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और असिस्टेंट SG एसवी राजू ने कहा, “यह एक बहुत ही चौंकाने वाला पैटर्न है। पहले भी जब संवैधानिक प्राधिकरण अपने अधिकार का प्रयोग कर रहे थे, मुख्यमंत्री वहां घुस जाती थीं। इस बार भी वही हुआ।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि आई-पैक छापेमारी के दौरान उच्च अधिकारियों ने उनके साथ “धर्ना” दिया और कई अधिकारियों ने खुद को व्यक्तिगत रूप से आहत बताया।
सुप्रीम कोर्ट में ED बनाम पश्चिम बंगाल सरकार
सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता उच्च न्यायालय में पिछले शुक्रवार को हुई “उलझन और हंगामा” की निंदा की। उस दिन, आई-पैक छापेमारी के संबंध में सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय में भारी व्यवधान उत्पन्न हुआ था, जिससे न्यायाधीश ने सुनवाई को स्थगित करना पड़ा। SG मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि “सुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में वकील और अन्य लोग कोलकाता उच्च न्यायालय में घुस आए। यह तब होता है जब लोकतंत्र की जगह भीड़तंत्र आ जाता है।”
इसके जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह कोलकाता उच्च न्यायालय में हुई घटनाओं से “बेहद परेशान” है। कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए ED द्वारा दर्ज की गई याचिका पर सुनवाई की।
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने कोर्ट को बताया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किसी भी प्रकार का व्यवधान नहीं डाला। उनका कहना था कि ममता बनर्जी ने आई-पैक प्रमुख प्रतीक जैन का लैपटॉप और निजी आईफोन अपने पास रख लिया था, ताकि पार्टी से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा सुरक्षित रहे। सिबल ने आरोप लगाया कि ED की छापेमारी पूरी तरह से “दुराचारी” थी, जिसका उद्देश्य अधिक से अधिक पार्टी सामग्री को अपने कब्जे में लेना था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इस छापेमारी का समय चुनाव से कुछ महीने पहले क्यों चुना गया।
सिबल ने कहा, “आई-पैक के पास पार्टी के सभी महत्वपूर्ण डेटा हैं। जब ED वहां गई, तो उन्हें पता था कि पार्टी की महत्वपूर्ण जानकारी वहां मौजूद है। अंतिम बयान कोल स्कैम मामले में 24 फरवरी 2024 को दर्ज हुआ था। तब से अब तक ED क्या कर रही थी? चुनावों के बीच अचानक छापेमारी क्यों? पार्टी की जानकारी हासिल करके चुनाव पर कैसे असर डाला जाएगा?”
आई-पैक और ED छापेमारी की घटनाएं
घटना के दौरान ममता बनर्जी आई-पैक प्रमुख प्रतीक जैन के निवास पर “दौड़ी” और वहां मौजूद पुलिस कर्मियों और मीडिया की भीड़ के बीच दस्तावेजों को लेकर निकलीं। इस दौरान उनके हाथ में पार्टी से जुड़े हार्ड डिस्क और संवेदनशील दस्तावेज भी थे। ED ने दावा किया कि इन छापेमारी का संबंध मनी लॉन्ड्रिंग मामले से है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की बेंच में न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली शामिल हैं। ED ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत यह याचिका दाखिल की है, जिसमें उनसे अनुरोध किया गया है कि पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र के गृह मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। याचिका में पश्चिम बंगाल डीजीपी राजीव कुमार, मनोज कुमार वर्मा, कोलकाता पुलिस कमिश्नर, और प्रियाबत्रा राय, DCP साउथ कोलकाता के खिलाफ निलंबन की सिफारिश की गई है।
राजनीतिक और कानूनी जटिलताएं
ममता बनर्जी और ED के बीच यह टकराव भारतीय राजनीति में संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज और राजनीतिक हस्तक्षेप के बीच एक नई बहस खड़ी करता है। ED ने आरोप लगाया कि आई-पैक छापेमारी के दौरान पुलिस अधिकारियों ने भी ममता के साथ मिलकर अधिकारियों के कार्य में बाधा डाली। वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार और सिबल की दलील है कि मुख्यमंत्री ने सिर्फ संवेदनशील डेटा और पार्टी सामग्री की सुरक्षा सुनिश्चित की और किसी भी प्रकार का अवरोध नहीं डाला।
इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि चुनाव के पहले यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर गर्माता जा रहा है। ED और ममता बनर्जी दोनों ने अपनी ओर से कठोर बयान दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आदेश देने से पहले पूरी घटनाओं की जांच कर रही है और चुनाव के समय इस मामले का निपटारा संवेदनशील स्थिति पैदा कर सकता है।
कोलकाता में आई-पैक पर ED की छापेमारी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया ने भारतीय राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया के बीच संतुलन को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि न्यायालय इस मामले में संवैधानिक अधिकारों और राजनीतिक हस्तक्षेप के बीच कैसे संतुलन स्थापित करता है। आई-पैक मामले में ED और ममता बनर्जी के बीच चल रही कानूनी लड़ाई चुनावी मौसम में पश्चिम बंगाल की राजनीति को और अधिक तड़क-भड़क बना रही है।