संभल जामा मस्जिद सर्वे पर रोक से हाईकोर्ट का इनकार, मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज

कोर्ट ने कहा- अब तक इस मामले में जो भी कार्रवाई हुई, वह सही है। हम कोर्ट कमिश्नर सर्वे में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। हिंदू पक्ष की ओर से दाखिल केस सुनने योग्य हैं।

Vin News Network
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संभल जामा मस्जिद सर्वे पर रोक से हाईकोर्ट का इनकार, मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज

प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने संभल में शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के लिए निचली अदालत द्वारा जारी आदेश को बरकरार रखा। मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी गई। अदालत ने निचली अदालत के आदेश में कोई मुद्दा नहीं पाया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी के संभल की जामा मस्जिद के सर्वे पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने मस्जिद कमेटी की उस सिविल रिवीजन याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें सर्वे पर रोक की मांग की गई थी। जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की बेंच ने सोमवार को यह आदेश दिया।

कोर्ट ने कहा- अब तक इस मामले में जो भी कार्रवाई हुई, वह सही है। हम कोर्ट कमिश्नर सर्वे में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। हिंदू पक्ष की ओर से दाखिल केस सुनने योग्य हैं। कोर्ट कमीशन सर्वे और दाखिल वाद पहले की तरह जारी रहेगा। यानी, जामा मस्जिद है या मंदिर इसका मुकदमा भी संभल की लोअर कोर्ट (दीवानी अदालत) में चलता रहेगा।

दरअसल, हिंदू पक्ष की याचिका पर संभल कोर्ट ने 19 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद के एडवोकेट कमिश्नर सर्वे का आदेश दिया। उसी शाम टीम सर्वे के लिए पहुंच गई थी। रात होने के कारण सर्वे पूरा नहीं हो पाया था। 5 दिन बाद यानी 24 नवंबर को दोबारा सर्वे के लिए एडवोकेट कमिश्नर और ASI टीम पहुंची थी। इस दौरान हिंसा भड़क गई। इसमें 4 लोगों की मौत हो गई थी।

हिंसा के बाद मस्जिद की इंतजामिया कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए सर्वे पर रोक लगाने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को आदेश दिया कि इस मामले की सुनवाई की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने तब तक संभल कोर्ट को इस मामले में आगे कार्रवाई करने से रोक दिया था।

8 जनवरी 2025 को हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए मस्जिद के सर्वे पर रोक लगा दी थी। साथ ही इंतजामिया कमेटी समेत सभी पक्ष से जवाब मांगा था। इसके बाद सुनवाई शुरू हुई। 13 मई को बहस पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला रिजर्व रख लिया था।
हाईकोर्ट ने अब सर्वे पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। साथ ही, कहा कि मुकदमा चलता रहेगा। एक्सपर्ट के मुताबिक, हाईकोर्ट ने संभल कोर्ट के सर्वे के फैसले को सही माना है। साथ ही, आगे वहीं पर कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

मस्जिद कमेटी हाईकोर्ट से रिवीजन याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट जा सकता है। हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकता है, ताकि सर्वे को रुकवाया जा सके। हिंदू पक्ष की कोशिश होगी कि सर्वे जल्दी शुरू हो। पूजा के अधिकार के लिए कोर्ट में पक्ष पेश करेगा। कोशिश होगी कि जल्द से जल्द लोअर कोर्ट से फैसला आए।

हिंदू पक्ष का दावा-संभल मस्जिद नहीं, हरिहर मंदिर
संभल की जामा मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष का दावा है कि ये पहले हरिहर मंदिर था, जिसे बाबर ने 1529 में तुड़वाकर मस्जिद बनवा दिया। इसे लेकर 19 नवंबर, 2024 को संभल कोर्ट में याचिका दायर हुई। उसी दिन यानी 19 नवंबर को सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य सिंह ने मस्जिद के अंदर सर्वे करने का आदेश दिया।

कोर्ट ने रमेश सिंह राघव को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया। उसी दिन शाम 4 बजे सर्वे के लिए टीम मस्जिद पहुंच गई। 2 घंटे सर्वे किया। हालांकि, उस दिन सर्वे पूरा नहीं हुआ। इसके बाद 24 नवंबर को सर्वे की टीम जामा मस्जिद पहुंची। मस्जिद के अंदर सर्वे हो रहा था। इसी दौरान भारी संख्या में लोग जुट गए। भीड़ ने पुलिस की टीम पर पत्थर फेंके। इसके बाद हिंसा भड़क गई। इसमें गोली लगने से 4 लोगों की मौत हो गई।

2 जनवरी, 2025 को दाखिल हुई थी सर्वे रिपोर्ट
संभल में जामा मस्जिद की 45 पन्नों की सर्वे रिपोर्ट चंदौसी कोर्ट में 2 जनवरी 2025 को दाखिल कर दी गई थी। 4.5 घंटे की वीडियोग्राफी और 1200 से अधिक फोटो भी अदालत को दिए गए। इसमें दावा किया गया कि जामा मस्जिद में मंदिर होने के सबूत मिले हैं। मस्जिद में 50 से ज्यादा फूल, निशान और कलाकृतियां मिली हैं। अंदर 2 वट वृक्ष हैं। हिंदू धर्म में वट वृक्ष की पूजा की जाती है। एक कुआं है, उसका आधा हिस्सा मस्जिद के अंदर और आधा हिस्सा बाहर है। बाहर वाले हिस्से को ढंक दिया गया है।

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