विन न्यूज़ नेटवर्क। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे सीजेपी के आंदोलन और उसे लेकर तेज होती सियासी बयानबाजी के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बिना किसी पार्टी का नाम लिए केंद्र सरकार पर निशाना साधा, वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का सीधे उल्लेख किए बिना आंदोलन के राजनीतिकरण पर भी सवाल उठाए। मायावती ने कहा कि जनहित से जुड़े गंभीर मुद्दों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने की बजाय उनका शांतिपूर्ण और संवैधानिक समाधान निकाला जाना चाहिए।
लाखों छात्र-छात्राओं और उनके परिवारों का भविष्य प्रभावित
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सिलसिलेवार पोस्ट करते हुए कहा कि, नई दिल्ली में संसद के निकट जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से चल रहा सीजेपी का अनिश्चितकालीन आंदोलन अब राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन चुका है। उन्होंने कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और कथित अनियमितताओं के कारण लाखों छात्र-छात्राओं और उनके परिवारों का भविष्य प्रभावित हुआ है। यही वजह है कि यह आंदोलन सड़क से लेकर संसद तक गूंज रहा है।

बसपा प्रमुख ने कहा कि शुरुआत में छात्रों के हितों से जुड़ा यह आंदोलन अब राजनीतिक दलों की सक्रियता के कारण सरकार और विपक्ष के बीच सीधे टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है। उनका मानना है कि इस स्थिति का जल्द समाधान निकाला जाना चाहिए, क्योंकि लंबे समय तक जारी तनाव से सिर्फ दिल्ली ही नहीं बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में भी आम जनजीवन प्रभावित हो सकता है।
व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही होनी चाहिए
मायावती ने अपने बयान में भ्रष्टाचार को इन सभी विवादों की मूल वजह बताया। उन्होंने कहा कि चाहे अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित गड़बड़ियों का मामला हो या फिर राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घटनाएं, इन सबके पीछे प्रशासनिक स्तर पर फैला भ्रष्टाचार जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि जब तक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही नहीं आएगी, तब तक ऐसी घटनाएं सामने आती रहेंगी।
उन्होंने आगे कहा कि यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं, बल्कि संवैधानिक नैतिकता से भी जुड़ा हुआ विषय है। मायावती ने याद दिलाया कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर ने सुशासन के लिए नैतिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही थी। यदि इन सिद्धांतों की अनदेखी होती रही तो भ्रष्टाचार देश को भीतर से कमजोर करता रहेगा।
बसपा सुप्रीमो ने सरकार और संवैधानिक संस्थाओं से भी सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और न्यायपालिका जैसी संस्थाओं को आगे बढ़कर इस पूरे मामले का निष्पक्ष और प्रभावी समाधान निकालना चाहिए, ताकि छात्रों और आम जनता का विश्वास कायम रह सके।
टकराव और हिंसा का माहौल लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं
अपने संदेश में मायावती ने राजनीतिक दलों को भी नसीहत दी। उन्होंने कहा कि किसी भी जनआंदोलन को अपने-अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल करना उचित नहीं है। उनका कहना था कि सड़क से संसद तक टकराव और हिंसा का माहौल लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए रास्ता निकालने की अपील की।
मायावती ने कहा कि आंदोलनकारी और सरकार दोनों को मिलकर ऐसा समाधान तलाशना चाहिए, जिससे छात्रों के हित सुरक्षित रहें और देश में शांति एवं सौहार्द का वातावरण बना रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनहित के मुद्दों का समाधान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि संवैधानिक प्रक्रिया और संवाद के माध्यम से ही संभव है।
बसपा प्रमुख का यह बयान ऐसे समय आया है जब सीजेपी के आंदोलन को लेकर विपक्षी दल लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर हैं और संसद के भीतर तथा बाहर इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन जारी है। ऐसे में मायावती का संतुलित रुख राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा का विषय बन गया है।