हापुड़, उत्तर प्रदेश। कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने हापुड़ जिले में एक नया कदम उठाया है। अब कांवड़ मार्ग पर मौजूद ढाबों और होटलों के बाहर उनके लाइसेंस धारकों के असली नाम स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके साथ ही मालिक की पहचान सत्यापित करने के लिए बारकोड या QR कोड भी लगाए जा रहे हैं।
नाम छिपाने को लेकर हुआ था विरोध
इस नियम को पहले लागू करने की कोशिश पर विरोध हुआ था, क्योंकि कई मुस्लिम संचालकों ने अपने ढाबों और होटलों पर हिंदू नाम लिखवा रखे थे, जिससे भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। प्रशासन के अनुसार, यह कदम इसलिए जरूरी हो गया था ताकि कोई धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ न कर सके और श्रद्धालुओं को पारदर्शी जानकारी मिल सके।
QR कोड से मिलेगी पूरी जानकारी
अब ढाबा या होटल के बाहर लगे QR कोड को स्कैन करके ग्राहक यह देख सकेंगे कि उस प्रतिष्ठान का लाइसेंस किसके नाम पर है और असली मालिक कौन है। यह प्रणाली लोगों को सचेत रहने में मदद करेगी, साथ ही प्रशासनिक पारदर्शिता भी बनाए रखेगी।
कुछ ने खोजा नया रास्ता
विवाद और जांच से बचने के लिए कुछ संचालकों ने हिंदू साझेदारों के नाम पर होटल-ढाबे रजिस्टर करवा लिए हैं, जिससे वे नियमों के दायरे में आ सकें। हालांकि प्रशासन इसे भी बारीकी से जांचने में जुटा है।
निकाल रहे है तोड़
सरकार के इस अभियान का कई ढाबा संचालकों ने तोड़ निकाल लिया है। उन्होंने अपने होटलों-ढाबों में हिंदुओं को साझीदार बना लिया है। स्टांप पर लिखवाकर उनको अपना पार्टनर दिखाया हुआ है। अब अपने हाटलों-ढाबों पर अपनी हिंदू मित्र का ही नाम लिखकर लगवा रहे हैं। गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र में ऐसे दो ढाबा संचालक सामने आए हैं। उन्होंने अपने हिंदू दोस्तों को पार्टनर बना लिया है।
सरकार के निर्देश पर क्यूआर कोड और प्लेट लगाने का कार्य जोरशोर से चल रहा है। हमारी टीम लगातार क्यूआर कोड लगवा रही हैं। इससे उपभोक्ताओं को बड़ा लाभ होने वाला है। प्रदेश में सभी दुकानों पर क्यूआर कोड आसैर प्लेट लगाई जाएंगी। – सोविंद्र सिंह- खाद्य सुरक्षा अधिकारी- गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र