महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने बुधवार को स्थानीय बीजेपी इकाइयों द्वारा प्रतिद्वंद्वी दलों के साथ बनाए गए पोस्ट-चुनावी गठबंधनों पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी गठबंधन व्यवस्थाएं न तो पार्टी की वरिष्ठ नेतृत्व द्वारा अनुमोदित थीं और न ही उन्हें स्वीकार किया जाएगा। फड़नवीस ने निर्देश दिया कि तुरंत सभी गैर-मान्य गठबंधनों को समाप्त किया जाए और जो नेता पार्टी के आदेश का पालन नहीं करेंगे उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से अंबरनाथ नगर परिषद में कांग्रेस और अकोट में AIMIM के साथ गठबंधनों को समाप्त करने का आदेश दिया। फड़नवीस ने कहा, “मैं स्पष्ट कर दूं कि कांग्रेस या AIMIM के साथ किसी भी प्रकार का गठबंधन स्वीकार्य नहीं होगा। यदि किसी स्थानीय नेता ने अपनी तरफ से ऐसा निर्णय लिया है तो यह अनुशासनहीनता है और उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में आवश्यक निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं।”
फड़नवीस की ये टिप्पणियाँ उस समय आई हैं जब पिछले महीने हुई नगर निगम चुनावों के बाद बीजेपी ने स्थानीय स्तर पर प्रतिद्वंद्वी दलों के साथ गठबंधन किया था। इन गठबंधनों ने न सिर्फ बीजेपी के सहयोगियों में नाराजगी पैदा की बल्कि विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया भी उभरी।
अंबरनाथ का मामला
अंबरनाथ में बीजेपी ने कांग्रेस और अजित पवार नेतृत्व वाले NCP के साथ मिलकर ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ का गठन किया। इस गठबंधन ने शिवसेना के नेता को हाशिए पर डाल दिया। बुधवार को बीजेपी की उम्मीदवार तेजश्री करंजुले पाटिल को नगर परिषद की अध्यक्ष चुना गया, जिन्होंने शिवसेना की मनीषा वलकेर को हराया।
अंबरनाथ नगर परिषद में कुल 60 सीटों पर हुए चुनाव में एकनाथ शिंदे नेतृत्व वाली शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जिसने 27 सीटें जीतीं। बीजेपी ने 14 सीटें, कांग्रेस ने 12 और NCP ने चार सीटें जीतीं। दो स्वतंत्र सदस्य भी चुने गए। एक स्वतंत्र सदस्य के समर्थन से तीन दलों का गठबंधन 32 सीटों तक पहुंच गया, जो 30 सीटों की बहुमत सीमा को पार करता है। उपाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया जल्द ही संपन्न होगी।
शिवसेना की प्रतिक्रिया
शिवसेना ने इस गठबंधन को “अनैतिक और अवसरवादी” करार दिया। शिवसेना (UBT) के विधायक डॉ. बालाजी किनिकर ने इसे “साझेदारी धर्म के खिलाफ” बताया और कहा कि यह गठबंधन बीजेपी के राष्ट्रीय नारे ‘कांग्रेस-मुक्त भारत’ के खिलाफ है।
बीजेपी की ओर से गठबंधन का बचाव करते हुए नगर निगम पार्षद अभिजीत करंजुले पाटिल ने कहा कि इस गठबंधन का उद्देश्य अंबरनाथ को “भ्रष्टाचार और धमकियों” से मुक्त करना था। हालांकि शिवसेना ने इस दावे को खारिज कर दिया।
अकोट का मामला
अकोट में बीजेपी ने AIMIM के साथ मिलकर ‘अकोट विकास मंच’ का गठन किया। इस गठबंधन में उद्धव ठाकरे नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT), एकनाथ शिंदे की शिवसेना, अजित पवार और शरद पवार के NCP और प्रहार जनशक्ति पार्टी का समर्थन भी शामिल था। 35 सदस्यीय परिषद में बीजेपी ने 11 सीटें, AIMIM ने पांच और अन्य दलों के समर्थन से गठबंधन की ताकत 25 तक पहुंच गई।
अकोट नगर परिषद की महापौर माया धुले बीजेपी के पक्ष में चुनी गईं, जिन्होंने AIMIM की फिरोज़ाबी सिकंदर राना को हराया। वहीं, रवि ठाकुर को बीजेपी समूह नेता बनाया गया। यह गठबंधन 13 जनवरी को होने वाले उपमहापौर और समिति चुनावों से पहले औपचारिक रूप से अकोला जिला प्रशासन में दर्ज किया गया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने कहा, “अकोट और अंबरनाथ में जो हुआ वह बीजेपी की असंवेदनशील और अवसरवादी रवैये को दिखाता है। पार्टी सत्ता पाने के लिए किसी के साथ भी गठबंधन कर सकती है।”
हालांकि मुख्यमंत्री फड़नवीस ने दोहराया कि इस तरह की स्थानीय स्तर की गठबंधन व्यवस्थाएं पार्टी अनुशासन का उल्लंघन हैं और उन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अभी के हांलात ने महाराष्ट्र की राजनीतिक परिस्थितियों को और पेचीदा बना दिया है। फड़नवीस का स्पष्ट संदेश है कि बीजेपी में अनुशासन सर्वोपरि है और किसी भी स्थानीय स्तर पर पार्टी की अनुमति के बिना गठबंधन करना गंभीर अनुशासनहीनता माना जाएगा। अंबरनाथ और अकोट के मामले यह दिखाते हैं कि सत्ता प्राप्ति की होड़ में स्थानीय नेता कभी-कभी पार्टी नीति के खिलाफ भी कदम उठा सकते हैं, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व द्वारा तत्काल हस्तक्षेप और स्पष्ट निर्देश पार्टी अनुशासन को बनाए रखने की दिशा में निर्णायक कदम साबित होंगे।