नई दिल्ली : विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत को अपने पड़ोसी देशों से हमेशा अच्छे और आसान रिश्तों की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। लेकिन भारत ने ऐसी समझदारी वाली नीति बनाई है, जिससे चाहे किसी देश में सरकार बदले, रिश्ते फिर भी ठीक बने रहें।
जयशंकर ने कहा, आखिरकार, हमारे हर पड़ोसी को यह समझना चाहिए कि भारत के साथ मिलकर काम करने से उनका फायदा होता है और न करने से नुकसान। कुछ देशों को इसे समझने में समय लगता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपवाद है, क्योंकि वहां की पहचान सेना के इर्द-गिर्द बनी है, उसमें शुरू से ही भारत के प्रति दुश्मनी भरी रहती है।
विदेश मंत्री ने कहा, पहले की सरकारों की नीति में पाकिस्तान को लेकर नरमी थी, लेकिन मोदी सरकार ने इसे बदल दिया। जयशंकर ने कहा कि अमेरिका के साथ रिश्तों में कभी-कभी अनिश्चितता होती है, इसलिए भारत ने उसके साथ ज्यादा से ज्यादा जुड़ाव बनाए ताकि रिश्ते संतुलित रहें।
चीन के बारे में उन्होंने कहा कि सीमा पर हालात कई बार बहुत मुश्किल हो गए, खासकर गलवान की झड़प के बाद। इसलिए हमें सीमा पर सड़कें और जरूरी सुविधाएं बनानी पड़ीं, जो पहले की सरकारों ने नजरअंदाज कर दी थीं। उन्होंने कहा, पहले सरकारों ने बॉर्डर पर विकास नहीं किया, जो बड़ी गलती थी। आज हम चीन के सामने मजबूती से खड़े हैं, क्योंकि हमने वहां जरूरी ढांचा तैयार किया है।
जयशंकर ने कहा कि पिछले 11 सालों में मोदी सरकार ने भारत के पड़ोसी देशों से रिश्ते मजबूत करने पर खास ध्यान दिया है। उन्होंने बताया कि श्रीलंका में सरकार बदली, लेकिन भारत से रिश्ते अच्छे बने रहे। मालदीव से शुरू में थोड़ी परेशानी थी, पर अब संबंध सुधर गए हैं। नेपाल की राजनीति में भारत को कई बार घसीटा जाता है, लेकिन हमें इससे परेशान नहीं होना चाहिए। रिश्तों में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन हमें समझदारी से काम लेना चाहिए। मुश्किल समय में हार नहीं माननी चाहिए, क्योंकि ऐसा करना कमजोर योजना का संकेत होता है।
जयशंकर ने 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के बारे में बताते हुए कहा कि अब भारत सिर्फ जवाब नहीं देता, बल्कि जरूरत पड़ने पर खुद भी पहल करता है। उन्होंने कहा कि अब पाकिस्तान को यह नहीं लगता कि वो कुछ भी कर लेगा और उसे सजा नहीं मिलेगी।