रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई आज सुबह की गई जब ईडी की टीम ने भिलाई स्थित बघेल निवास पर छापा मारा।
पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने खुद सोशल मीडिया पर छापेमारी की जानकारी साझा की और केंद्र सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया।
क्या है पूरा मामला?
चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी उस मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़ी है जिसमें छत्तीसगढ़ में शराब वितरण प्रणाली में भ्रष्टाचार और घोटाले के आरोप लगे हैं। ईडी इस मामले की जांच काफी समय से कर रही थी और पहले भी राज्य में कई कारोबारी, अफसर और नेताओं पर शिकंजा कस चुकी है। बताया जा रहा है कि शराब की बिक्री से अवैध रूप से अर्जित धन को वैध रूप में बदलने के आरोप में यह कार्रवाई की गई है। ईडी को चैतन्य बघेल के खिलाफ मनी ट्रेल से जुड़े कई सबूत मिले हैं, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया।
भूपेश बघेल का केंद्र पर आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा: “मेरे बेटे के खिलाफ ईडी की कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है। जब-जब भाजपा छत्तीसगढ़ में चुनाव हारती है, तब-तब ये रेड होती है। ये सिर्फ मुझे डराने की कोशिश है।” बघेल ने यह भी कहा कि वो कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और सच्चाई को सामने लाएंगे।
ईडी की अब तक की जांच
- ईडी की इस केस में अब तक 100 करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी का संदेह है।
- इससे पहले भी कई अधिकारी, डिस्ट्रीब्यूटर और राज्य के शराब कारोबारी जांच के घेरे में आ चुके हैं।
- छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में लगातार रेड और दस्तावेजी जांच जारी है।
- ईडी के अधिकारियों का कहना है कि मनी लॉन्ड्रिंग की प्रक्रिया में फर्जी कंपनियों और शेल फर्म्स का इस्तेमाल किया गया है।