पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली : पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सार्थक पहल

पर्यावरण बचाएँ – जीवन बचाएँ, आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संवारें!

Vin News Network
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प्रतिभागी पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने का संकल्प लेते हुए
Highlights
  • थीम: “पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली – सुरक्षित भविष्य की दिशा”
  • मुख्य वक्ता: डॉ. संध्या मिश्रा, डॉ. वर्तिका सिंह, श्री मनीष चौधरी, अनामता नफ़ीस वारसी
  • प्रतिभागियों ने पर्यावरण-अनुकूल आदतें अपनाने का संकल्प लिया

तेजी से बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य में प्रकृति संरक्षण और सतत विकास आज की सबसे बड़ी चुनौतियाँ बन चुकी हैं। इसी कड़ी में, मुक्ति फाउंडेशन के तत्वावधान में तथा वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद – राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (CSIR-NBRI) के पर्यावरण सूचना जागरूकता, क्षमता निर्माण एवं आजीविका कार्यक्रम (EIAP) केन्द्र द्वारा 22 अगस्त 2025 को एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देना, लोगों में पर्यावरणीय जिम्मेदारी की भावना जागृत करना और सतत भविष्य की दिशा में सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करना।

मुख्य अतिथि एवं विशेषज्ञ

इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श के लिए प्रसिद्ध विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया, जिनमें प्रमुख रूप से:

  • डॉ. संध्या मिश्रा – प्रोग्राम अधिकारी
  • डॉ. वर्तिका सिंह – सूचना अधिकारी
  • श्री मनीष चौधरी – आईटी अधिकारी
  • अनामता नफ़ीस वारसी – पर्यावरण कार्यकर्ता

इन सभी वक्ताओं ने प्रतिभागियों को यह समझाया कि कैसे छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाकर हम बड़े पर्यावरणीय परिणाम हासिल कर सकते हैं।

पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली की आवश्यकता

डॉ. संध्या मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा: “आज हमारा ग्रह जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों की कमी जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में यदि हम अपनी जीवनशैली में पर्यावरणीय दृष्टिकोण अपनाएँ, तो हम न केवल धरती के संतुलन को बनाए रख सकते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य भी सुनिश्चित कर सकते हैं।”

जल, ऊर्जा और संसाधनों की बचत पर जोर
डॉ. वर्तिका सिंह ने बताया कि हमारे दैनिक जीवन में जल, ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों की बचत सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा: “बिजली के उपकरणों का सोच-समझकर उपयोग, वर्षा जल संचयन, रिसाइक्लिंग और ग्रीन एनर्जी का अपनाना हमें सतत विकास की राह पर ले जाता है। प्रत्येक व्यक्ति यदि ऊर्जा और पानी की खपत पर नियंत्रण करे, तो यह सामूहिक रूप से बड़े स्तर पर पर्यावरणीय बदलाव ला सकता है।”

प्लास्टिक का कम उपयोग — बड़ा कदम

कार्यक्रम के दौरान श्री मनीष चौधरी ने प्लास्टिक प्रदूषण को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा: “प्लास्टिक हमारी धरती के लिए एक धीमी मौत बन चुका है। हमें सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का इस्तेमाल कम से कम करना होगा। कपड़े, जूट और बायोडिग्रेडेबल सामग्री के उपयोग को प्राथमिकता देनी चाहिए।”

वृक्षारोपण और नवीकरणीय ऊर्जा का महत्व
पर्यावरण कार्यकर्ता अनामता नफ़ीस वारसी ने हरित क्रांति पर जोर देते हुए कहा: “हमें केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि लगाए गए पौधों की संरक्षा और देखभाल भी उतनी ही आवश्यक है। साथ ही, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को अपनाना भी अब समय की आवश्यकता बन चुका है।”

समाज में जागरूकता और सहभागिता
कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य यह भी था कि प्रतिभागी स्वयं पर्यावरण योद्धा बनें। इसके तहत सभी प्रतिभागियों ने यह संकल्प लिया कि: वे अपने घरों और कार्यस्थलों पर पर्यावरण-अनुकूल आदतों को अपनाएँगे। वे प्लास्टिक उपयोग को कम करेंगे। वे अधिक से अधिक वृक्षारोपण करेंगे। दसमाज में पर्यावरण संरक्षण की जागरूकता फैलाएँगे।

विशेष संदेश
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने संदेश दिया कि: “यदि हम आज नहीं जागे, तो कल बहुत देर हो जाएगी। पर्यावरण संरक्षण कोई विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्यता है।”

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