विन न्यूज़ नेटवर्क। उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा छोड़ने के बाद अब अपनी अगली पारी का ऐलान कर दिया है। करीब नौ मिनट के वीडियो संदेश में उन्होंने साफ कहा कि वह राजनीति में कदम रखेंगी। हालांकि, उन्होंने किसी राजनीतिक दल में शामिल होने से इनकार किया है। दिव्या मित्तल ने कहा कि वह लोगों के साथ मिलकर एक ऐसा राजनीतिक मंच तैयार करना चाहती हैं, जहां आम लोगों की समस्याओं और सवालों को जगह मिले।
इस्तीफे के बाद पहली बार बताया आगे का रास्ता
दिव्या मित्तल ने वीडियो की शुरुआत में अपने इस्तीफे का जिक्र करते हुए कहा कि उनके फैसले के बाद लोगों के मन में कई सवाल थे कि अब वह क्या करेंगी, किसके साथ जाएंगी और कहां से शुरुआत करेंगी। उन्होंने कहा कि कुछ समय तक उन्होंने इन सवालों का जवाब नहीं दिया, क्योंकि वह अपने अगले कदम को लेकर तैयारी कर रही थीं।
अब उन्होंने इन सवालों का जवाब देते हुए कहा कि उनका अगला कदम राजनीति है। उन्होंने इसे आम लोगों की आवाज बनने का माध्यम बताया।
स्कूल से लेकर जमीन तक के अनुभव गिनाए
अपने वीडियो में दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा के दौरान सामने आए कई अनुभव साझा किए। उन्होंने एक गांव की महिला का उदाहरण देते हुए बताया कि महिला ने पानी या पक्के मकान की मांग करने के बजाय अपने गांव में आगे की पढ़ाई के लिए स्कूल बनाने की मांग की थी। दिव्या के मुताबिक, उन्होंने नियमों के तहत स्कूल को मंजूरी दिलाई, लेकिन वर्षों बाद भी निर्माण शुरू नहीं हो सका।
उन्होंने कहा कि ऐसे अनुभवों ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर किया कि सिर्फ सरकारी मंजूरी और पैसा पर्याप्त नहीं है, बल्कि काम पूरा कराने के लिए इच्छाशक्ति भी जरूरी है।
बोलीं- न्याय लोगों का हक है
पूर्व आईएएस ने एक भूमिहीन व्यक्ति का भी जिक्र किया, जिसे सरकारी जमीन का पट्टा मिलने के बावजूद कब्जा नहीं मिल पाया था। उन्होंने दावा किया कि जांच में संबंधित रिपोर्ट गलत पाई गई और उसमें कार्रवाई भी हुई, लेकिन इसके बाद भी जमीन पर कब्जा दिलाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।
दिव्या मित्तल ने इसी अनुभव को आधार बनाते हुए कहा कि आम आदमी को अपने अधिकार के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए। उनके अनुसार, शासन व्यवस्था में लोगों की शिकायत सुनना और उस पर कार्रवाई करना जरूरी है।
पेपर लीक और AI से रोजगार तक का मुद्दा उठाया
दिव्या मित्तल ने युवाओं की पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और रोजगार के भविष्य का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि आज का युवा कई साल तैयारी करने के बाद भी परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं का सामना करता है।
उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI के बढ़ते इस्तेमाल का भी जिक्र किया। दिव्या ने कहा कि आने वाले समय में कई तरह के काम तकनीक के जरिए होने लगेंगे और युवाओं के रोजगार को लेकर सवाल खड़े होंगे। उन्होंने कहा कि इन विषयों पर अभी से गंभीर चर्चा की जरूरत है।
बोलीं- राजनीति में पैसा, बाहुबल और जातीय समीकरण नहीं होंगे आधार
अपने संदेश में दिव्या मित्तल ने कहा कि वह ऐसी राजनीति करना चाहती हैं, जिसमें पैसा, बाहुबल और जाति-धर्म के समीकरण प्रमुख आधार न हों। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल किसी एक राजनेता को बदलना नहीं, बल्कि राजनीति के काम करने के तरीके में बदलाव लाना है।
उन्होंने कहा कि चुनाव में इस्तेमाल होने वाले संसाधनों के बजाय उनका जोर जनता से जुड़ी समस्याओं, जैसे सड़क, पुल और स्कूल पर रहेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि राजनीति में लोगों को उनकी जाति या धर्म के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। ये उनके अपने राजनीतिक विचार हैं।
राजनीतिक अफवाहों पर भी दिया जवाब
दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो में उन दावों का भी जिक्र किया, जिनमें उनके इस्तीफे को किसी राजनीतिक नेता से मुलाकात से जोड़कर देखा गया था। उन्होंने कहा कि उनके बारे में एक राजनीतिक दल के प्रवक्ता की ओर से ऐसी बात कही गई, जबकि उनके अनुसार वह मुलाकात हुई ही नहीं थी। उन्होंने कहा कि वह इस तरह की बातों से डरने वाली नहीं हैं और आगे भी सवाल उठाती रहेंगी।
उत्तर प्रदेश से शुरू करेंगी राजनीतिक सफर
दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश को अपनी कर्मभूमि बताते हुए कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत यहीं से होगी। उन्होंने अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में लोगों के साथ हुए अनुभवों को इसका आधार बताया।
उन्होंने कहा कि वह लोगों के साथ मिलकर एक ऐसा मंच बनाने की कोशिश करेंगी, जो आम नागरिकों के मुद्दों को आगे रखे। फिलहाल उन्होंने किसी राजनीतिक दल में शामिल होने की घोषणा नहीं की है। उनकी ओर से आगे इस मंच का स्वरूप, संगठन और चुनावी रणनीति कैसे होगी, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।