सऊदी अरब पर बढ़ते खतरे के बीच क्राउन प्रिंस की बढ़ी चिंता, ‘कौन करेगा सुरक्षा?’

Vin News Network
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ईरान-हूती दबाव के बीच सऊदी की मुश्किलें बढ़ीं

विन न्यूज़ नेटवर्क। सऊदी अरब और पूरे खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती सैन्य अस्थिरता के बीच देश की सुरक्षा को लेकर नई बहस छिड़ गई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) एचआर मैकमास्टर ने कहा है कि क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे हमलों का असर सऊदी अरब की आर्थिक योजनाओं पर भी पड़ सकता है।

उनके मुताबिक, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के सामने सुरक्षा और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है।

सुरक्षा चिंता के केंद्र में विजन 2030

मैकमास्टर ने कहा कि सऊदी अरब की महत्वाकांक्षी ‘विजन 2030’ योजना का लक्ष्य अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से आगे ले जाकर वित्त, तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में विस्तार करना है। इसके लिए विदेशी निवेश और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का भरोसा जरूरी है। लेकिन क्षेत्र में लगातार संघर्ष और ऊर्जा ढांचे पर हमलों से निवेश के लिए जरूरी स्थिर माहौल प्रभावित हो सकता है।

हाल के महीनों में सऊदी अरब की ऊर्जा सुविधाओं और महत्वपूर्ण ढांचे पर हमलों की खबरें सामने आई हैं। सितंबर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सऊदी की ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन पर हुए हमले में ईरान की संभावित भूमिका की बात कही थी।

‘आखिर मेरी हिफाजत कौन करेगा?’

मैकमास्टर ने सऊदी नेतृत्व के सामने मौजूद सुरक्षा चिंता को एक सवाल के जरिए समझाया। उनका कहना है कि यदि रियाद खुद को वैश्विक वित्तीय, तकनीकी और एआई केंद्र के रूप में विकसित करना चाहता है, तो उसे ऐसा वातावरण चाहिए जहां निवेश और कारोबार सुरक्षित महसूस करें।

उनके मुताबिक, इसी संदर्भ में सऊदी नेतृत्व के सामने यह सवाल उठ सकता है कि संकट की स्थिति में उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर कौन निभाएगा। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब रियाद अपनी सुरक्षा साझेदारियों को कई देशों तक विस्तार देने की कोशिश कर रहा है।

अमेरिका पर निर्भरता के साथ दूसरे विकल्प भी

सऊदी अरब लंबे समय से अमेरिका का प्रमुख सुरक्षा साझेदार रहा है, लेकिन मौजूदा क्षेत्रीय संकट ने रियाद को अन्य देशों के साथ भी रक्षा संबंध मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ाया है। मिस्र, तुर्किये और पाकिस्तान के साथ सहयोग तथा ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौता’ इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है। चाथम हाउस के विश्लेषण के मुताबिक, सऊदी अरब ने अतिरिक्त सुरक्षा साझेदारों की तलाश के संकेत दिए हैं।

ईरान और हूती मोर्चे से दबाव

मैकमास्टर ने आरोप लगाया कि ईरान खाड़ी देशों के बीच सुरक्षा संबंधी आशंकाओं का फायदा उठाकर उनकी एकजुटता कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर, यमन के हूती विद्रोहियों से जुड़ा खतरा भी सऊदी अरब के लिए गंभीर बना हुआ है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब ने हूती हमलों से निपटने के लिए क्षेत्रीय और पश्चिमी सहयोगियों से सैन्य सहायता की मांग की है, जबकि उसकी मिसाइल रक्षा क्षमताओं पर भी दबाव की खबरें सामने आई हैं।

ऐसे में सऊदी अरब के सामने चुनौती केवल सैन्य सुरक्षा तक सीमित नहीं है। क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा और विदेशी निवेश का भरोसा सीधे उसकी आर्थिक परिवर्तन योजना से जुड़े हुए हैं। Vision 2030 के भविष्य के लिए सुरक्षा वातावरण एक अहम कारक बना हुआ है।

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