विन न्यूज़ नेटवर्क। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जहां राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है, वहीं छात्र आंदोलन से जुड़े चेहरों के परिवारों की भावनाएं भी सामने आने लगी हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दीपके की मां अनीता दीपके ने पहली बार मीडिया से बात करते हुए अपने बेटे को लेकर गर्व और चिंता, दोनों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान हर दिन बेटे की सुरक्षा को लेकर डर बना रहता था, लेकिन अब उन्हें इस बात की खुशी है कि उसकी मेहनत और संघर्ष को देश ने देखा।
‘मुझे अपने बेटे पर बहुत गर्व है’
अनीता दीपके ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर मिलने के बाद उन्हें बेहद खुशी हुई। उनके मुताबिक, बेटे ने जिस उद्देश्य के लिए संघर्ष किया, उसका असर अब दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि एक मां के तौर पर यह पल उनके लिए बेहद भावुक है। उनका मानना है कि कम उम्र में अभिजीत ने जिस तरह अपनी बात रखने की कोशिश की, वह उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा समाज के लिए कुछ अच्छा करे और उन्हें लगता है कि उनके बेटे ने वही करने की कोशिश की है।
‘जब उसे पीटा गया तो रातों की नींद उड़ गई’
अनीता दीपके ने बातचीत के दौरान उस घटना का भी जिक्र किया, जब आंदोलन के दौरान अभिजीत के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। उन्होंने कहा कि उस घटना के बाद उनका मन पूरी तरह बेचैन हो गया था।
उनके मुताबिक, बेटे के साथ हुई मारपीट की खबर मिलने के बाद कई रातों तक उन्हें नींद नहीं आई। वह देर रात तक जागती रहती थीं और बार-बार यही सोचती थीं कि आगे उसके साथ क्या होगा। उन्होंने बताया कि एक मां के लिए अपने बच्चे की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता होती है और वही चिंता उन्हें लगातार परेशान करती रही।
‘न भूख लगी, न किसी काम में मन’
अनीता ने बताया कि आंदोलन शुरू होने के बाद से पूरे परिवार की दिनचर्या बदल गई थी। उन्होंने कहा कि कई दिनों तक उनका किसी भी काम में मन नहीं लगा। परिवार के सदस्य लगातार अभिजीत की चिंता में डूबे रहे।
उन्होंने बताया कि तनाव इतना अधिक था कि उन्हें और परिवार के अन्य लोगों को ठीक से भूख भी नहीं लगती थी। घर का माहौल पूरी तरह बदल गया था और हर समय बेटे की सलामती की चिंता बनी रहती थी।
‘इतनी छोटी उम्र में बड़ा काम किया’
अनीता दीपके ने कहा कि अभिजीत अभी काफी युवा हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने जिस साहस के साथ अपनी बात रखी, वह सराहनीय है। उन्होंने कहा कि कम उम्र में इतना बड़ा आंदोलन खड़ा करना आसान नहीं होता।
उनका कहना था कि बेटे ने अपने विश्वास के लिए संघर्ष किया और अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से रखने की कोशिश की। एक मां होने के नाते उन्हें उस पर गर्व है और उन्हें उम्मीद है कि वह आगे भी समाज के हित से जुड़े मुद्दों पर जिम्मेदारी के साथ काम करेगा।
इस्तीफे के बाद बढ़ी चर्चा
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्र आंदोलन और उससे जुड़े चेहरों की चर्चा लगातार बढ़ गई है। इसी कड़ी में अभिजीत दीपके और उनके परिवार की प्रतिक्रिया भी सुर्खियों में है। सोशल मीडिया पर कई लोग अनीता दीपके के बयान साझा कर रहे हैं और आंदोलन के दौरान परिवारों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को लेकर भी चर्चा हो रही है।
हालांकि, आंदोलन से जुड़े विभिन्न दावों और उनके प्रभाव को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों और संगठनों की अपनी-अपनी राय है। इस पूरे घटनाक्रम पर बहस अभी भी जारी है।
आगे क्या?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब केंद्र सरकार के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हैं। वहीं, छात्र आंदोलन से जुड़े संगठन अपनी आगे की रणनीति तैयार कर रहे हैं। इस बीच अभिजीत दीपके की मां का भावुक बयान यह भी दिखाता है कि बड़े आंदोलनों के पीछे केवल प्रदर्शनकारी ही नहीं, बल्कि उनके परिवार भी मानसिक और भावनात्मक दबाव का सामना करते हैं।