देश में इंटरनेट और स्मार्टफोन के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर क्राइम के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। छोटी-सी लापरवाही भी लोगों की मेहनत की कमाई को मिनटों में खत्म कर सकती है। इसी वजह से अब भारत में साइबर ठगी एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
1930 हेल्पलाइन पर रिकॉर्ड शिकायतें
राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में इस हेल्पलाइन पर करीब 3.24 करोड़ शिकायतें दर्ज की गईं। वहीं 2024 में 2.21 करोड़ और 2023 में 96.4 लाख कॉल्स प्राप्त हुई थीं। यह आंकड़े साफ दिखाते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में साइबर क्राइम के मामले कई गुना बढ़ गए हैं।
रोजाना बढ़ता बोझ
रोजाना आने वाली शिकायतों में भी भारी वृद्धि हुई है। 2023 में जहां प्रतिदिन लगभग 26 हजार कॉल्स आती थीं, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 55 हजार से अधिक हो गई है। इससे स्पष्ट होता है कि लोग अब साइबर फ्रॉड को लेकर अधिक सतर्क हो रहे हैं और तुरंत शिकायत दर्ज कर रहे हैं।
साइबर क्राइम बढ़ने के कारण
विशेषज्ञों के अनुसार साइबर अपराध बढ़ने के दो प्रमुख कारण हैं—पहला, अपराधियों के नए और उन्नत तरीके और दूसरा, लोगों में बढ़ती जागरूकता। आजकल फिशिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, सोशल मीडिया हैकिंग और पहचान की चोरी जैसे मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे आम लोग ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
1930 हेल्पलाइन की भूमिका
सरकार द्वारा संचालित 1930 हेल्पलाइन साइबर फ्रॉड मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यदि कोई व्यक्ति समय पर शिकायत दर्ज करता है, तो कई मामलों में ठगी गई राशि को तुरंत फ्रीज कराया जा सकता है, जिससे नुकसान को कम किया जा सकता है।
साइबर फ्रॉड से बचाव के जरूरी उपाय
साइबर अपराध से बचने के लिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी अनजान कॉल या लिंक पर भरोसा न करें। बैंक डिटेल्स, आधार या पैन जैसी संवेदनशील जानकारी किसी के साथ साझा न करें। इसके अलावा अनजान सोशल मीडिया ग्रुप्स से दूर रहें और कम समय में ज्यादा मुनाफे वाले ऑफर्स या “लाइक-शेयर से कमाई” जैसे झांसे से बचें। सतर्कता ही साइबर फ्रॉड से बचाव का सबसे बड़ा तरीका है।