केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने छात्रों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव और मानसिक तनाव को कम करने के उद्देश्य से एक अहम निर्णय लिया है। बोर्ड ने अपने सभी संबद्ध स्कूलों के लिए करियर काउंसलर और वेलनेस टीचर की नियुक्ति को अनिवार्य कर दिया है। यह नया नियम देशभर के सभी CBSE स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा।
CBSE की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब स्कूलों को न केवल छात्रों की अकादमिक जरूरतों पर ध्यान देना होगा, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य और करियर मार्गदर्शन की जिम्मेदारी भी संस्थागत रूप से निभानी होगी।
CBSE ने साझा की नई गाइडलाइंस
CBSE द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी में कहा गया है,
“प्रत्येक 500 छात्रों पर एक नियमित काउंसलिंग और वेलनेस टीचर या सोशल-इमोशनल काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य होगी। इसके साथ ही कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों के लिए करियर काउंसलर की व्यवस्था भी जरूरी होगी।”
बोर्ड के अनुसार, यह नियम छात्रों को विषय चयन, आगे की पढ़ाई और करियर विकल्पों को लेकर सही मार्गदर्शन देने के उद्देश्य से लागू किया गया है।
हाई कोर्ट में दायर याचिका के बाद लिया गया निर्णय
CBSE ने यह फैसला जुलाई 2025 में राजस्थान हाई कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका के बाद लिया। याचिका में छात्रों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव, मानसिक तनाव, परीक्षा से जुड़ी चिंता और करियर काउंसलिंग की कमी का मुद्दा उठाया गया था। अदालत ने इस मामले में CBSE से जवाब तलब किया था।
इसके बाद बोर्ड ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने और स्कूलों में सहयोगात्मक माहौल तैयार करने के लिए यह नया नियम तैयार किया।
पहले क्या था प्रावधान
नए नियम से पहले CBSE के दिशा-निर्देशों के अनुसार, केवल उन स्कूलों में फुल-टाइम साइकोलॉजिकल काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य थी, जहां कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों की संख्या 300 से अधिक होती थी।
छोटे स्कूलों को पार्ट-टाइम काउंसलर रखने की अनुमति दी गई थी।
हालांकि, करियर काउंसलर को लेकर कोई स्पष्ट और अनिवार्य प्रावधान सभी स्कूलों के लिए लागू नहीं था। नए नियम के बाद यह व्यवस्था अब सभी स्कूलों के लिए अनिवार्य कर दी गई है।
करियर काउंसलर और वेलनेस टीचर की भूमिका
CBSE के अनुसार, करियर काउंसलर और वेलनेस टीचर छात्रों को अकादमिक दबाव से निपटने, मानसिक समस्याओं की पहचान करने और सही करियर विकल्प चुनने में मदद करेंगे।
ये काउंसलर छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों को भी मार्गदर्शन प्रदान करेंगे, ताकि बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास को बेहतर बनाया जा सके।
योग्यता और प्रशिक्षण की शर्तें
- बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, करियर काउंसलर और वेलनेस टीचर के लिए निम्न योग्यताएं अनिवार्य होंगी:
- मनोविज्ञान (Psychology) या सामाजिक कार्य (Social Work) में डिग्री
- CBSE से मान्यता प्राप्त कम से कम 50 घंटे का प्रशिक्षण
- छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक विकास और करियर मार्गदर्शन से संबंधित कार्य का अनुभव
छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर फोकस
CBSE का मानना है कि बोर्ड परीक्षाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर को लेकर छात्रों पर बढ़ता दबाव उनकी मानसिक स्थिति को प्रभावित कर रहा है। इस नई व्यवस्था के जरिए स्कूलों में समय रहते समस्याओं की पहचान कर समाधान सुनिश्चित किया जा सकेगा।
बोर्ड ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे तय मानकों के अनुसार काउंसलर की नियुक्ति प्रक्रिया जल्द पूरी करें।