‘कैप नंबर 278 अब विदा लेता है…’ अजिंक्य रहाणे ने क्रिकेट को कहा अलविदा, भावुक वीडियो से फैंस की आंखें हुईं नम

Vin News Network
Vin News Network
6 Min Read
अजिंक्य रहाणे ने क्रिकेट से लिया संन्यास

विन न्यूज़ नेटवर्क। भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी बल्लेबाज, पूर्व उपकप्तान और टेस्ट क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल अजिंक्य रहाणे ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक भावुक वीडियो के जरिए 38 वर्षीय रहाणे ने अपने करोड़ों प्रशंसकों को इस फैसले की जानकारी दी। उनके इस ऐलान के साथ भारतीय क्रिकेट के एक ऐसे अध्याय का अंत हो गया, जिसने अपने संयम, तकनीक और टीम के प्रति समर्पण से करोड़ों दिलों में खास जगह बनाई।

रहाणे लंबे समय से भारतीय टीम से बाहर चल रहे थे। उन्होंने जुलाई 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला था। साल 2011 में टीम इंडिया के लिए पदार्पण करने वाले रहाणे ने डेढ़ दशक से अधिक लंबे करियर में भारतीय क्रिकेट को कई यादगार पल दिए।

‘कैप नंबर 278 अब विदा लेता है’

अजिंक्य रहाणे ने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो के कैप्शन में लिखा, “कैप नंबर 278 अब विदा ले रहा है। इतने सालों तक मिले प्यार और सहयोग के लिए धन्यवाद। मैं हमेशा आभारी रहूंगा।”

वीडियो में उन्होंने बेहद भावुक अंदाज में कहा कि हर सफर की एक शुरुआत होती है और एक अंत भी। उनके मुताबिक, जब सही समय आता है तो उस फैसले का सम्मान करते हुए आगे बढ़ना ही बेहतर होता है। उन्होंने कहा कि जैसे उन्होंने बल्लेबाजी में हमेशा सही टाइमिंग पर भरोसा किया, उसी तरह अब उन्हें लगा कि क्रिकेट को अलविदा कहने का यही सही समय है।

डोंबिवली से टीम इंडिया तक का प्रेरणादायक सफर

अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए रहाणे ने कहा कि डोंबिवली से अभ्यास के लिए आने-जाने वाला वह छोटा बच्चा सिर्फ एक सपना देखता था- भारत की जर्सी पहनने का। उन्होंने बताया कि हर दिन, हर पारी और हर मौके पर उनका लक्ष्य सिर्फ देश के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना था।

उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा टीम को खुद से ऊपर रखा और पूरी ईमानदारी के साथ क्रिकेट खेला। उनका मानना रहा कि यदि नीयत साफ हो तो खेल भी खिलाड़ी का सम्मान करता है।

भारतीय क्रिकेट के बदलते दौर के बने गवाह

रहाणे ने अपने फर्स्ट क्लास क्रिकेट डेब्यू को याद करते हुए कहा कि पिछले दो दशकों में भारतीय क्रिकेट ने अभूतपूर्व तरक्की की है और इस बदलाव का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व की बात है।

उन्होंने कहा कि एक खिलाड़ी के तौर पर उनका अध्याय भले ही समाप्त हो रहा हो, लेकिन क्रिकेट से उनका रिश्ता कभी खत्म नहीं होगा। अब वह अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों का मार्गदर्शन करना चाहते हैं और अपने अनुभव तथा खेल से सीखे मूल्यों को युवाओं तक पहुंचाना चाहते हैं।

हार-जीत से बड़ा रहा क्रिकेट का सफर

रहाणे ने कहा कि मुंबई के युवा खिलाड़ी से लेकर भारत का प्रतिनिधित्व करने तक का सफर उनके लिए किसी सम्मान से कम नहीं रहा। इस दौरान उन्हें कई बड़ी जीत मिलीं, कुछ हार भी झेलनी पड़ीं, लेकिन क्रिकेट ने उन्हें जो अनुभव और यादें दीं, वही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि हैं।

उन्होंने स्वीकार किया कि क्रिकेटर के जीवन में असफलताएं भी आती हैं और उन्होंने भी कई बार हार का सामना किया। हालांकि उनका मानना है कि एक जगह ऐसी रही, जहां वे कभी नहीं हारे और वह है क्रिकेट प्रेमियों का दिल।

सभी का जताया आभार

अपने विदाई संदेश में अजिंक्य रहाणे ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI), मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA), अपने साथी खिलाड़ियों, कोचों, आईपीएल फ्रेंचाइजियों, परिवार, पत्नी राधिका, दोस्तों और सभी प्रशंसकों का दिल से धन्यवाद किया।

उन्होंने कहा कि प्रशंसकों का प्यार और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा। कठिन दौर में भी फैंस ने उनका साथ नहीं छोड़ा और यही उनके करियर की सबसे बड़ी पूंजी है।

शानदार रहा अजिंक्य रहाणे का अंतरराष्ट्रीय करियर

अजिंक्य रहाणे ने 2011 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा और टेस्ट, वनडे तथा टी-20 तीनों प्रारूपों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने कई विदेशी दौरों पर शानदार पारियां खेलीं और मुश्किल परिस्थितियों में टीम इंडिया को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उनकी बल्लेबाजी हमेशा भारतीय टीम की ताकत रही।

उनकी शांत कप्तानी और धैर्यपूर्ण नेतृत्व को भी क्रिकेट जगत हमेशा याद रखेगा। मैदान पर उनका संयम, अनुशासन और टीम भावना युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहे हैं।

अजिंक्य रहाणे के संन्यास के साथ भारतीय क्रिकेट ने अपने सबसे भरोसेमंद और विनम्र खिलाड़ियों में से एक को विदाई दी है। उनका करियर सिर्फ रनों और रिकॉर्ड्स तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने अपने व्यवहार, नेतृत्व और समर्पण से क्रिकेट प्रेमियों का दिल भी जीता। भले ही अब वह मैदान पर भारतीय जर्सी में नजर नहीं आएंगे, लेकिन भारतीय क्रिकेट में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *