Gen-Z को गटर छाप कहना गलत’: कंगना रनौत के बयान पर सौरव दास का पलटवार, बोले- नेताओं को शब्दों की मर्यादा रखनी चाहिए

Vin News Network
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'गटर छाप' बयान पर सौरव दास का पलटवार

विन न्यूज़ नेटवर्क। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद कंगना रनौत की ओर से Gen-Z को लेकर की गई टिप्पणी पर सियासी बहस तेज हो गई है। कंगना के Generation Gutter और “गटर छाप” वाले बयान को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी क्रम में सीजेपी (Cockroach Janata Party) के प्रवक्ता सौरव दास ने भी कंगना के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को अपनी भाषा और शब्दों की मर्यादा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

सौरव दास ने कहा कि किसी भी पीढ़ी के लिए इस तरह की टिप्पणी उचित नहीं है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं के योगदान को कम करके नहीं आंका जा सकता।

‘कंगना को उनकी पार्टी में भी गंभीरता से नहीं लिया जाता’

मीडिया से बातचीत के दौरान सौरव दास ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि कंगना रनौत की बातों को बहुत गंभीरता से लिया जाता है। उन्होंने कहा कि उनकी अपनी पार्टी के लोग भी उन्हें उतनी गंभीरता से नहीं लेते, इसलिए उनकी टिप्पणियों पर अधिक प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता नहीं है।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि एक सांसद होने के नाते कंगना रनौत को अपने शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए, क्योंकि उनके बयान का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।

‘नेताओं को अपनी शब्दावली संभालनी चाहिए’

सौरव दास ने कहा कि नेताओं के लिए भाषा की गरिमा बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी पूरी पीढ़ी के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल उचित नहीं माना जा सकता।

उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी देश के विकास, लोकतांत्रिक प्रक्रिया और सामाजिक बदलाव में सक्रिय भूमिका निभा रही है। ऐसे में युवाओं को अपमानित करने वाली टिप्पणियां समाज में गलत संदेश देती हैं।

सौरव दास ने कहा कि लोकतंत्र में युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है और उन्होंने कई सामाजिक व लोकतांत्रिक मुद्दों पर अपनी सक्रिय भूमिका निभाई है। इसलिए किसी भी जनप्रतिनिधि को इस तरह के बयान देने से बचना चाहिए।

सरकार के सामने दोहराईं अपनी मांगें

कंगना रनौत के बयान पर प्रतिक्रिया देने के साथ-साथ सौरव दास ने हालिया आंदोलन और प्रदर्शनकारियों से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उनकी कुछ प्रमुख मांगें अभी तक पूरी नहीं हुई हैं और सरकार को इस दिशा में जल्द कदम उठाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जानी चाहिए। साथ ही भविष्य में इस तरह की कार्रवाई नहीं किए जाने का लिखित आश्वासन भी सरकार को देना चाहिए।

‘हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई हो’

सौरव दास ने कहा कि आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी समझौते की बात हुई है तो उसका पूरी तरह पालन होना चाहिए।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस पक्ष का भी उल्लेख किया, जिसमें पहले से दर्ज मामलों वाले लोगों को लेकर अलग दृष्टिकोण की बात कही गई थी। इस पर उन्होंने कहा कि उनकी मांग स्पष्ट है और सभी प्रदर्शनकारियों के लिए समान राहत मिलनी चाहिए।

सरकारी नोटिफिकेशन का इंतजार

सौरव दास ने बताया कि सरकार के प्रतिनिधियों के साथ देर रात तक बैठक हुई थी, जिसमें प्रदर्शनकारियों की रिहाई और सरकारी अधिसूचना के मसौदे पर चर्चा हुई।

उनके अनुसार, कुछ राज्यों ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है, जबकि अन्य जगहों पर भाषा और शर्तों को लेकर बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि अब सरकार की ओर से औपचारिक नोटिफिकेशन जारी होने का इंतजार है।

कंगना के बयान पर जारी है बहस

कंगना रनौत की Gen-Z को लेकर की गई टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बहस तेज हो गई है। जहां एक ओर उनके बयान की आलोचना की जा रही है, वहीं दूसरी ओर समर्थक इसे उनकी व्यक्तिगत राय बता रहे हैं।

फिलहाल इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं और आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है।

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