पटना। बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मी तेज होती जा रही है। इस बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी अब बिहार विधानसभा चुनाव अपने दम पर लड़ेगी।
ओवैसी ने बताया कि उनकी पार्टी ने महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई थी, लेकिन उन्हें वहां से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। ऐसे में AIMIM ने फैसला किया है कि वह अब तीसरा मोर्चा बनाने पर काम करेगी।
सीमांचल रहेगा केंद्र में
ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी का खास फोकस इस बार सीमांचल क्षेत्र पर होगा। सीमांचल यानी किशनगंज, अररिया, कटिहार और पूर्णिया जैसे जिलों में AIMIM का खास प्रभाव है। पिछले चुनाव में भी पार्टी को सीमांचल से ही कुछ सफलता मिली थी।
AIMIM प्रमुख ने कहा कि, “हमने बिहार की जनता की आवाज़ बनने का संकल्प लिया है। अगर महागठबंधन हमें साथ नहीं लेना चाहता तो हम अपने रास्ते पर चलेंगे।” उन्होंने तीसरे मोर्चे की बात दोहराते हुए अन्य समान विचारधारा वाली पार्टियों से भी संपर्क साधने की बात कही।
महागठबंधन की चुप्पी
AIMIM की तरफ से गठबंधन में शामिल होने की पहल के बावजूद महागठबंधन की तरफ से अब तक कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है। सूत्रों की मानें तो आरजेडी और कांग्रेस जैसे दल AIMIM को साथ लेने के पक्ष में नहीं थे। AIMIM के कुछ पुराने बयानों और विचारधारात्मक भिन्नताओं के चलते महागठबंधन में असहमति बनी रही।
चुनावी समीकरणों पर असर
AIMIM के इस फैसले से बिहार की चुनावी राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। सीमांचल क्षेत्र में AIMIM का अच्छा जनाधार है और अगर तीसरे मोर्चे की पहल सफल होती है, तो वह मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगा सकती है। इससे महागठबंधन को नुकसान हो सकता है, खासतौर पर आरजेडी को।