पुरुलिया, पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों का बिगुल बज चुका है और इसके साथ ही राज्य का राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया है। मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने रविवार, 29 मार्च 2026 को पुरुलिया में एक विशाल चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर अब तक का सबसे बड़ा और तीखा हमला बोला। ममता बनर्जी ने इस रैली के जरिए न केवल अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं, बल्कि बीजेपी की विचारधारा और उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
खाने-पीने की आजादी पर हमला: ममता का बड़ा आरोप
पुरुलिया की इस रैली में ममता बनर्जी का सबसे चर्चित बयान ‘खान-पान’ को लेकर रहा। उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि बीजेपी एक ऐसी पार्टी है जो लोगों की निजी जिंदगी और उनकी पसंद-नापसंद पर भी कब्जा करना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी बंगाल के लोगों को मछली, मांस और अंडा खाने से रोकना चाहती है। ममता ने कहा, “बंगाल की संस्कृति में मछली और चावल का खास महत्व है, लेकिन बीजेपी अपनी कट्टरपंथी सोच थोपकर हमारे खान-पान की आदतों को बदलना चाहती है।” उन्होंने यह भी दावा किया कि बीजेपी असल में किसी धर्म में विश्वास नहीं करती, बल्कि वह धर्म का इस्तेमाल केवल सत्ता पाने के लिए करती है।
बीजेपी शासित राज्यों की स्थिति पर उठाए सवाल
ममता बनर्जी ने अपने भाषण में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे बीजेपी शासित राज्यों का उदाहरण देते हुए उन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में बीजेपी की सरकार है, वहां लगातार दंगे होते हैं और समाज में नफरत फैलाई जाती है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से आदिवासियों और महिलाओं के मुद्दों को उठाते हुए कहा, “बीजेपी शासित राज्यों में आदिवासियों का लगातार शोषण किया जा रहा है और महिलाओं पर हमले हो रहे हैं। बंगाल में हमारी मां-बहनें सुरक्षित हैं, लेकिन बीजेपी यहां का माहौल बिगाड़ना चाहती है।”
चार्जशीट बनाम असली चार्जशीट की जंग
हाल ही में बीजेपी के एक केंद्रीय नेता द्वारा टीएमसी सरकार के खिलाफ जारी की गई ‘चार्जशीट’ पर पलटवार करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि यह पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि असली चार्जशीट तो बीजेपी के खिलाफ होनी चाहिए, जिन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाया है और समाज को बांटा है। गुजरात दंगों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिन लोगों का इतिहास दंगों से भरा हो, उन्हें बंगाल की शांतिपूर्ण सरकार पर उंगली उठाने का कोई हक नहीं है।
2026 विधानसभा चुनाव का पूरा गणित
पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए होने वाला यह चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प होने वाला है। चुनाव आयोग ने पहले ही इसका शेड्यूल जारी कर दिया है:
- पहला चरण: 23 अप्रैल 2026
- दूसरा चरण: 29 अप्रैल 2026
- नतीजे: 4 मई 2026
इस चुनाव में बंगाल के करीब 7 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। मतदाताओं के आंकड़ों पर नजर डालें तो इसमें 3.6 करोड़ पुरुष और 3.4 करोड़ महिला वोटर शामिल हैं। साथ ही 1402 थर्ड जेंडर वोटर भी इस बार लोकतंत्र के इस महापर्व में अपनी भागीदारी निभाएंगे।
2021 के नतीजों का साया
साल 2021 के विधानसभा चुनाव बंगाल के इतिहास के सबसे कठिन चुनावों में से एक थे। उस समय 8 चरणों में मतदान हुआ था और बीजेपी ने पूरी ताकत झोंक दी थी। हालांकि, नतीजों ने सबको चौंका दिया था। टीएमसी ने 215 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया था, जबकि बीजेपी महज 77 सीटों पर सिमट गई थी। ममता बनर्जी ने लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर अपनी ताकत दिखाई थी। अब 2026 में सवाल यह है कि क्या ममता अपनी इस जीत को बरकरार रख पाएंगी या बीजेपी 2021 की हार का बदला ले पाएगी।
पुरुलिया की इस रैली के बाद बंगाल की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है। खान-पान, आदिवासी अधिकार और विकास के दावों के बीच अब जनता को तय करना है कि वह 23 अप्रैल को किसके पक्ष में बटन दबाएगी।