बरेली विवाद: मौलाना तौकीर रज़ा की ‘राजनीतिक भीड़’ योजना का पर्दाफाश, पूर्व जिलाध्यक्ष ने किए अहम खुलासे

Vin News Network
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मौलाना तौकीर रज़ा की अपील पर जुटी भीड़, पुलिस ने संभाला मोर्चा
Highlights
  • मौलाना तौकीर ने नमाज़ के बाद भीड़ जुटाकर सियासी दबदबा दिखाने की कोशिश की।
  • संवेदनशील मसले को चुनावी फायदे के लिए इस्तेमाल करने की साजिश।
  • पूर्व जिलाध्यक्ष नदीम खां ने फर्जी पत्र और गुटबाज़ी का खुलासा किया।

बरेली। बरेली में शुक्रवार की नमाज के बाद हुए विवाद को लेकर पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के प्रमुख मौलाना तौकीर रज़ा पर आरोप है कि उन्होंने धार्मिक भावना की आड़ में भीड़ जुटाकर अपना सियासी दबदबा दिखाने की कोशिश की। इस योजना को लेकर उनके करीबी और पूर्व जिलाध्यक्ष नदीम खां ने पुलिस को कई अहम जानकारियां दी हैं।

भीड़ के जरिए रसूख दिखाने की थी तैयारी
पुलिस पूछताछ में नदीम खां ने बताया कि मौलाना तौकीर पिछले डेढ़ साल से बरेली में खुद से कोई बड़ी भीड़ नहीं जुटा पा रहे थे जिससे वह चिंतित और असहज महसूस कर रहे थे। उनका इरादा इस्लामिया मैदान में नमाज के बाद भारी भीड़ के साथ अपनी ताकत दिखाने का था। इस कदम से वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समुदाय में फिर से अपना प्रभाव स्थापित करना चाहते थे।

2027 चुनाव से पहले दिखाना चाहते थे सियासी दम
सूत्रों के अनुसार, मौलाना की इस कोशिश के पीछे एक बड़ा राजनीतिक एजेंडा भी था। 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले वह खुद को मुस्लिम समाज का रहनुमा बताकर प्रमुख राजनीतिक दलों कांग्रेस, सपा और बसपा के नज़दीक फिर से आना चाहते थे।

अंदरूनी कलह से बिगड़ा मामला
नदीम खां ने खुलासा किया कि IMC में आंतरिक खेमेबाज़ी पहले से चल रही थी। एक गुट जिसमें नदीम और डॉ. नफीस शामिल थे मौलाना के करीब माने जाते थे। जबकि दूसरा गुट मुनीर इदरीशी, अनीस सकलैनी और अहसानुल हक लगातार मौलाना के फैसलों को प्रभावित करने की कोशिश करता रहा। जब प्रदर्शन स्थगित करने के लिए एक पत्र प्रशासन को सौंपा गया जिसमें लियाकत खां के नाम का उल्लेख था तब दूसरे गुट ने मौलाना को यह कहकर भड़का दिया कि बिना उनकी मौजूदगी के उनका नाम गलत तरीके से डाला गया है। इससे मौलाना ने पत्र को “फर्जी” बता दिया और फिर आयोजन को कराने की जिद पर अड़ गए।

फर्जी पत्र और सोशल मीडिया पर भ्रम
जांच में सामने आया कि प्रशासन को सौंपा गया पत्र कथित रूप से फर्जी था जिसमें लियाकत खां के फर्जी हस्ताक्षर कराए गए थे। यह पत्र बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसे मौलाना ने भी “फर्जी” करार दिया और एक वीडियो के ज़रिए उसका खंडन किया।

प्रदर्शन में किसकी थी भूमिका?
नदीम खां ने खुद को इस विवाद से दूर बताते हुए कहा कि वह तो लोगों को शांत करने की कोशिश कर रहे थे लेकिन उन्होंने मुनीर इदरीशी और डॉ. नफीस को इस पूरे घटनाक्रम में भीड़ जुटाने में मुख्य भूमिका निभाने वाला बताया। पुलिस पूछताछ के दौरान यह भी पता चला कि नदीम शाहजहांपुर भाग गया था और वहीं से उसे पकड़ा गया। उससे मिली जानकारी से पुलिस को अन्य आरोपियों की पहचान और केस की विवेचना में मदद मिल रही है।

पुलिस का बयान
एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि नदीम से हुई पूछताछ में कई अहम सुराग मिले हैं जो आगामी गिरफ्तारी और जांच के लिए उपयोगी होंगे। पुलिस अब इस मामले में शामिल सभी गुटों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है।

नतीजा
बरेली में शुरू हुआ यह विवाद केवल एक धार्मिक आयोजन का मामला नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपी राजनीतिक महत्वाकांक्षा, संगठन के आंतरिक विवाद और रणनीतिक प्रचार का परिणाम था। मौलाना तौकीर रज़ा की मंशा और उनके करीबी लोगों की भूमिकाएं अब जांच एजेंसियों के निशाने पर हैं।

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