इंडिगो की बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द होने के बाद देशभर में अचानक बढ़ी यात्री मांग को देखते हुए भारतीय रेलवे ने आपात रूप से अपनी सेवाओं में बड़ा विस्तार किया है। मंत्रालय के अनुसार, यात्रियों की बढ़ती भीड़ को संभालने और विभिन्न मार्गों पर उपलब्धता बढ़ाने के लिए 37 प्रीमियम ट्रेनों में कुल 116 अतिरिक्त कोच लगाए गए हैं। ये कोच 114 अतिरिक्त फेरे या उन्नत यात्राओं में उपयोग किए जा रहे हैं, जिससे देश के कई हिस्सों में रेल यात्रा की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
रेल मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए रेल प्रशासन ने तेज़ी से कार्रवाई की है। मंत्रालय ने कहा कि अचानक बढ़ी मांग का दबाव सबसे अधिक दक्षिण भारत के रेल मार्गों पर महसूस किया जा रहा था, जहाँ यात्रियों की संख्या सामान्य क्षमता से कहीं अधिक बढ़ गई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए सदर्न रेलवे (Southern Railway – SR) ने सबसे अधिक विस्तार किया है। SR ने 18 प्रीमियम ट्रेनों में कोच बढ़ाए, जिससे दक्षिणी क्षेत्र में यात्री क्षमता में बड़ा इजाफा हुआ है।
विज्ञप्ति में कहा गया, “दक्षिणी रेलवे ने उच्च मांग वाले मार्गों पर चेयर कार और स्लीपर क्लास के अतिरिक्त डिब्बे जोड़े हैं। ये वृद्धि 6 दिसंबर 2025 से लागू की गई है और इससे दक्षिण भारत में उपलब्ध सीटों की संख्या में उल्लेखनीय सुधार आया है।” मंत्रालय के अनुसार, त्योहारों के बाद तथा उड़ानों में बाधा के कारण अचानक रेल मार्गों की ओर रुख करने वाले यात्रियों की संख्या में तेजी से हुए इजाफे को इन बढ़ोतरी के माध्यम से संतुलित करने का प्रयास किया गया है।
दूसरी ओर, नॉर्दर्न रेलवे (Northern Railway – NR) ने भी यात्री दबाव को देखते हुए कई अहम रूटों पर कोच बढ़ाए हैं। मंत्रालय ने बताया कि उत्तर भारत के व्यस्त मार्गों पर 3एसी (AC-3 Tier) और चेयर कार कोच की अधिक मांग देखी जा रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए NR ने आठ लोकप्रिय ट्रेनों में अतिरिक्त डिब्बे जोड़े हैं। मंत्रालय का कहना है कि, “इन कोचों को आज से लागू किया गया है और इससे उत्तर भारत के सबसे अधिक यात्रा वाले कॉरिडोर पर सीटों की उपलब्धता में काफी राहत मिलेगी।”
इसी प्रकार वेस्टर्न रेलवे (Western Railway – WR) ने भी भारी भीड़ वाले मार्गों में सुधार के लिए कदम उठाए हैं। WR ने चार प्रमुख ट्रेनों में अतिरिक्त 3AC और 2AC कोच जोड़े हैं। यह विस्तार 6 दिसंबर से प्रभावी हुआ है और इसका मुख्य उद्देश्य पश्चिमी राज्यों से राष्ट्रीय राजधानी की ओर आने वाले यात्रियों की बढ़ती संख्या का बोझ कम करना है। मंत्रालय ने कहा कि मुंबई, गुजरात, राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों से दिल्ली की ओर बढ़ते यातायात को देखते हुए इन कोचों की आवश्यकता महसूस की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि उड़ान सेवाओं में व्यापक व्यवधान और लगातार रद्दीकरण के कारण यात्रियों का रुझान रेल यात्रा की ओर बढ़ा है। जिन लोगों की हवाई यात्रा अचानक रद्द हुई, उनमें से ज्यादातर ने त्वरित विकल्प के रूप में रेल मार्ग को चुना, जिससे कई प्रीमियम ट्रेनें पूरी तरह भर गईं। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए रेलवे ने तेज़ी से अतिरिक्त डिब्बों को तैनात कर व्यवस्था को संतुलित करने का प्रयास किया।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि कोच वृद्धि केवल अस्थायी समाधान नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने की रणनीति का हिस्सा है कि अचानक आने वाली किसी भी आपदा या भीड़ की स्थिति में यात्री यात्रा से वंचित न रहें। मंत्रालय के अनुसार, जहां-जहां भी मांग अधिक पाई जा रही है, वहाँ क्षमता विस्तार की संभावना पर लगातार नजर रखी जा रही है। आवश्यकता होने पर आने वाले दिनों में भी अतिरिक्त कोच जोड़े जा सकते हैं।
रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी जोड़े गए कोच सुरक्षा मानकों और परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप हैं। कोच जोड़ने की प्रक्रिया में तकनीकी और परिचालन टीमों ने तेज़ी से काम किया, ताकि यात्री सेवाएँ बिना किसी देरी या व्यवधान के सुचारू रूप से जारी रह सकें।
उड़ानों में पैदा हुए संकट के बीच रेलवे की इस त्वरित कार्रवाई को यात्रियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। उपलब्धता में वृद्धि से न केवल तत्काल यात्रा करने वाले लोगों को सुविधा मिलेगी, बल्कि उन यात्रियों को भी विकल्प मिलेगा जिन्हें अपने कार्यक्रम के अनुसार यात्रा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।