प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अल फलाह यू मेडिकल कॉलेज से जुड़े कथित बड़े घोटाले का खुलासा करते हुए एक विस्तृत अभियोजन शिकायत दाखिल की है। लगभग 200 पन्नों की इस शिकायत में ईडी ने दावा किया है कि जावेद अहमद सिद्दीकी के नेतृत्व वाले अल फलाह यू ग्रुप ने नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हुए फर्जी डॉक्टरों, नकली फैकल्टी और कागजों पर मौजूद मरीजों के जरिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) को गुमराह किया। ईडी के अनुसार, यह पूरा तंत्र एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य मेडिकल कॉलेज को मान्यता दिलाना और इसके जरिए बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग करना था। एजेंसी ने इस मामले में लगभग 500 करोड़ रुपये के धन शोधन का आरोप लगाया है और इसे धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत दर्ज किया गया है। अदालत 31 जनवरी को इस मामले में संज्ञान लेने पर फैसला कर सकती है।
ईडी की शिकायत में कहा गया है कि अल फalah मेडिकल कॉलेज वास्तव में आवश्यक शिक्षकों, डॉक्टरों और कर्मचारियों के बिना संचालित हो रहा था। कॉलेज में जिन डॉक्टरों और फैकल्टी सदस्यों को नियुक्त दिखाया गया था, वे अधिकतर केवल कागजों तक सीमित थे। जांच एजेंसी के मुताबिक, इन तथाकथित डॉक्टरों को सिर्फ बायोमेट्रिक सिस्टम में उपस्थिति दर्ज कराने के लिए रखा गया था ताकि एनएमसी की शर्तों को पूरा दिखाया जा सके। कॉलेज की वाइस चांसलर और प्रिंसिपल डॉ. भूपिंदर कौर आनंद ने अपने बयान में ईडी को बताया कि मेडिकल स्टाफ का कोई वास्तविक शैक्षणिक या चिकित्सकीय कार्य नहीं था। उनका कहना है कि ये डॉक्टर न तो कक्षाएं लेते थे और न ही अस्पताल में मरीजों का इलाज करते थे, बल्कि केवल बायोमेट्रिक मशीन पर पंच करने के लिए मौजूद रहते थे।
ईडी के अनुसार, डॉ. भूपिंदर कौर के बयान से यह भी सामने आया है कि फैकल्टी की उपस्थिति केवल रिकॉर्ड में दिखाई जाती थी। हकीकत में वे कॉलेज नहीं आते थे। यह व्यवस्था कॉलेज प्रबंधन द्वारा जानबूझकर बनाई गई थी ताकि नियमों का पालन करने का दिखावा किया जा सके। एजेंसी का कहना है कि एनएमसी की 12 जून 2025 को होने वाली निरीक्षण प्रक्रिया से ठीक पहले कॉलेज में आनन-फानन में कई पद भरे गए। इन नियुक्तियों की प्रक्रिया भी संदिग्ध बताई गई है। शिकायत में कहा गया है कि वॉक-इन इंटरव्यू के जरिए लोगों को बुलाया गया और अंतिम मंजूरी सीधे चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी से ली गई। किसी भी पेशेवर भर्ती एजेंसी की सेवाएं नहीं ली गईं।
ईडी ने अपनी शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि रेड फोर्ट ब्लास्ट मामले में गिरफ्तार किए गए डॉक्टरों, जिनमें डॉ. मुजम्मिल, डॉ. शाहीन और अन्य शामिल हैं, की नियुक्ति भी इसी तरह की प्रक्रिया से की गई थी। एजेंसी का दावा है कि इन सभी नियुक्तियों के पीछे सिद्दीकी की सीधी भूमिका थी और उनका उद्देश्य कॉलेज के रिकॉर्ड को मजबूत दिखाना था, न कि वास्तविक शैक्षणिक या चिकित्सा सेवाएं प्रदान करना।
जांच में एक और गंभीर आरोप ‘कागजों पर मरीज’ को लेकर सामने आया है। ईडी के मुताबिक, मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में मरीजों की संख्या भी फर्जी तरीके से दिखाई जाती थी। आईटी विभाग के प्रमुख फर्दीन बेग ने 24 दिसंबर 2025 को दिए अपने बयान में बताया कि एनएमसी के निरीक्षण से पहले अस्पताल में नकली मरीज लाए जाते थे। इन मरीजों को अस्पताल में भर्ती दिखाकर बेड ऑक्यूपेंसी पूरी दर्शाई जाती थी। ईडी का कहना है कि यह काम पब्लिक रिलेशंस स्टाफ और आशा वर्कर्स की मदद से किया जाता था। शिकायत के अनुसार, इस पूरी साजिश में चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी की सहमति और जानकारी शामिल थी।
ईडी ने अल फalah मेडिकल कॉलेज के संचालन को ‘वन मैन शो’ करार दिया है। एजेंसी का आरोप है कि सिद्दीकी ही कॉलेज और विश्वविद्यालय से जुड़े सभी अहम फैसले लेते थे। अन्य बोर्ड सदस्य केवल नाम के लिए थे और उनकी भूमिका कागजों तक सीमित थी। शिकायत में कहा गया है कि कई अहम मुद्दों पर कभी कोई बैठक हुई ही नहीं, लेकिन बैठकों के फर्जी मिनट्स तैयार कर रिकॉर्ड में दर्ज कर दिए गए। इससे यह दिखाने की कोशिश की गई कि संस्थान नियमों के अनुसार चल रहा है।
जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि कॉलेज से जुड़े निर्माण कार्यों में भी अनियमितताएं हुईं। ईडी के अनुसार, कर्कुन कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपर्स और आमला एंटरप्राइजेज नाम की कंपनियां जावेद अहमद सिद्दीकी द्वारा ही बनाई गई थीं। इन कंपनियों में उनके परिवार के सदस्यों को शामिल किया गया था। मेडिकल कॉलेज और हॉस्टल के निर्माण से जुड़े सभी ठेके इन्हीं कंपनियों को दिए गए। ईडी का आरोप है कि इस तरह से निर्माण कार्यों के जरिए भी धन का दुरुपयोग और शोधन किया गया।
ईडी की शिकायत में यह भी रेखांकित किया गया है कि अल फalah मेडिकल कॉलेज पहले भी विवादों में रहा है। संस्थान का नाम उस कथित ‘व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ से जोड़ा गया था, जिसका संबंध दिल्ली के रेड फोर्ट ब्लास्ट मामले से बताया गया था। अब इस नए मामले में एजेंसी का कहना है कि कॉलेज का पूरा ढांचा नियमों को तोड़कर और सरकारी संस्थाओं को गुमराह करके खड़ा किया गया।
एजेंसी के अनुसार, यह मामला केवल शैक्षणिक संस्थान में अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बड़े पैमाने पर आर्थिक अपराध और संस्थागत धोखाधड़ी का उदाहरण है। ईडी ने अदालत से अनुरोध किया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। फिलहाल, अदालत द्वारा 31 जनवरी को यह तय किया जाना है कि इस अभियोजन शिकायत पर संज्ञान लिया जाएगा या नहीं। इस बीच, अल फalah ग्रुप और उसके चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी के लिए यह मामला कानूनी और छवि दोनों के लिहाज से बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।