सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लखनऊ के अपने कार्यालय से सोमवार को पत्रकारों से मुख़ातिब होते हुए केंद्र सरकार और भाजपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने नोटबंदी के दौर में बड़े पैमाने पर धन इकठ्ठा किया और अब उनकी नज़र सोने पर है जिससे सोने की क़ीमतें बढ़ रही हैं और आम लोगों की जेबों पर असर पड़ रहा है।
अखिलेश ने कहा कि किसानों को बड़े वादे देकर भटकाया गया कहा गया उनकी आय दोगुनी हो जाएगी मगर हकीकत में कुछ बदलने वाला नहीं दिखा। उन्होंने महंगाई, ईंधन और बिजली के बढ़े बिलों का जिक्र करते हुए कहा कि आज घर बनाना और रोज़मर्रा की चीज़ें बहुत महँगी हो चुकी है। उनका तर्क था कि नोटबंदी के समय जो धन उठाया गया था उसका असर आज सामने आ रहा है और अब सोने की बढ़ती मांग पर भी सवाल उठते है आखिर यह सोना किसके पास जा रहा है जब आम आदमी अपनी बेटी को शादी में छोटी-सी चेन भी नहीं दे पा रहा?
भाजपा से जुड़े लोगों पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए गए। अखिलेश ने बताया कि बिहार भेजी जा रही 35 हजार लीटर शराब पकड़ी गई और कहा कि कफ़ सिरफ़ (कागज़ पर खुराक) जैसी गड़बड़ियों में भाजपा के लोग शामिल हैं। उन्होंने 2022 के चुनावी वादों का जिक्र किया मुफ्त आटा, हर युवा को मोबाइल और कहा कि जनता ने उन वादों को स्वीकार नहीं किया।
राज्य सरकारों की नीतियों और सार्वजनिक सेवाओं पर भी सवाल उठाए गए। अखिलेश ने कहा कि अस्पताल खोले जा रहे हैं पर इलाज की सुविधाओं की कमी है, कैंसर उपचार आदि पर पर्याप्त इंतज़ाम नहीं है और कई बार प्राइवेट अस्पतालों के उद्घाटन को ही उपलब्धि बताकर खुश कर लिया जाता है। सपा नेता ने यह भी कहा कि आधार से संबंधित मामले में अदालतों तक जाना पड़ेगा यदि सिस्टम में ढिलाई रहती है।
चुनावी प्रक्रियाओं पर चौकस रहने का आह्वान करते हुए अखिलेश ने कहा कि पीडीए का एक भी वोट कटने नहीं दिया जाएगा और बेईमानी के खिलाफ संघर्ष जारी रखा जाएगा। उन्होंने बिहार की कानून-व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि वहां ‘जंगल राज’ का माहौल है और अधिकारियों के मिलीभगत से जमीनों पर कब्जे जैसे मामलों को लेकर गंभीर नोटिस लिया जाना चाहिए।