भारतीय शेयर बाजार में आईटी सेक्टर इन दिनों भारी दबाव में है। Infosys, Tata Consultancy Services और HCL Technologies जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। मंगलवार, 24 फरवरी को भी आईटी शेयरों में बिकवाली का सिलसिला जारी रहा और निफ्टी आईटी इंडेक्स लगातार पांचवें दिन गिरावट के साथ बंद हुआ।
निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 3.5 प्रतिशत गिरकर 30,417.75 के स्तर पर पहुंच गया, जो इसका 52 हफ्तों का सबसे निचला स्तर है। फरवरी महीने में अब तक यह इंडेक्स लगभग 20 प्रतिशत टूट चुका है। आंकड़ों के मुताबिक, इस गिरावट के चलते आईटी सेक्टर की मार्केट वैल्यू में करीब 5.05 लाख करोड़ रुपये की कमी आई है।
इस दौरान इंडेक्स में शामिल सभी कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखे। Persistent Systems, HCL Technologies और Coforge के शेयरों में 4 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। वहीं Infosys में करीब 3.7 प्रतिशत, TCS में 3.5 प्रतिशत और Wipro में लगभग 2.9 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।
पिछले एक महीने में आईटी शेयरों में कुल मिलाकर 24 प्रतिशत तक की गिरावट आई है, जिसका मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बढ़ती चिंताएं हैं।
आईटी शेयर क्यों गिर रहे हैं?
आईटी सेक्टर में गिरावट की शुरुआत इस महीने की शुरुआत में हुई, जब Anthropic ने अपना नया एआई मॉडल Claude लॉन्च किया। यह मॉडल कई इंडस्ट्रीज के लिए गेम-चेंजर माना जा रहा है, खासकर आईटी सर्विस सेक्टर के लिए।
Anthropic ने हाल ही में Claude Code टूल भी पेश किया, जो COBOL जैसी पुरानी प्रोग्रामिंग भाषाओं पर आधारित सिस्टम को आधुनिक बनाने में सक्षम बताया जा रहा है। इससे निवेशकों को डर है कि एआई तकनीक भविष्य में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और मेंटेनेंस जैसी सेवाओं को काफी हद तक ऑटोमेट कर सकती है।
इसके अलावा, Alphabet Inc. और Amazon.com Inc. जैसी बड़ी टेक कंपनियों द्वारा Nvidia Corporation के एआई चिप्स में भारी निवेश भी बाजार की चिंता बढ़ा रहा है। निवेशकों को शक है कि इतनी बड़ी एआई इन्वेस्टमेंट्स से भविष्य में कितना मुनाफा होगा।
HSBC ग्लोबल रिसर्च के मुताबिक, आने वाले वर्षों में एआई अपनाने से आईटी सेक्टर की कमाई पर 14–16 प्रतिशत तक का नकारात्मक असर पड़ सकता है।
Jefferies ने TCS और Infosys समेत छह आईटी कंपनियों की रेटिंग घटा दी है। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि एआई के चलते बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव आ सकता है, जिससे वैल्यूएशन पर दबाव पड़ेगा। worst-case scenario में आईटी सेक्टर के शेयरों में 30–65 प्रतिशत तक और गिरावट की आशंका जताई गई है।
Jefferies ने कंपनियों की कमाई के अनुमान भी 1–4 प्रतिशत तक घटा दिए हैं और अब FY26 से FY28 के बीच केवल 6 प्रतिशत की औसत ग्रोथ का अनुमान लगाया है।
इसी तरह CLSA ने भी Coforge, Infosys, TCS, Tech Mahindra और Wipro समेत आठ आईटी कंपनियों के टारगेट प्राइस कम कर दिए हैं। CLSA का मानना है कि सेक्टर में अभी 5–10 प्रतिशत तक और गिरावट आ सकती है।
एआई टेक्नोलॉजी के बढ़ते प्रभाव ने आईटी सेक्टर के भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है। निवेशक सतर्क हो गए हैं और यही वजह है कि आईटी शेयरों में लगातार बिकवाली देखने को मिल रही है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि कंपनियां इस तकनीकी बदलाव के साथ खुद को कैसे ढालती हैं।