तेहरान, मार्च 2026 ईरान ने एक बेहद नाजुक और तनावपूर्ण दौर में अपने नए सुप्रीम लीडर का चुनाव कर लिया है। इजरायल और अमेरिका के हमले में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान की शीर्ष संस्था ने सोमवार को मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर घोषित किया। अमेरिका और इजरायल की खुली धमकियों के बावजूद ईरान की तमाम राजनीतिक और सुरक्षा संस्थाएं नए नेता के पीछे पूरी तरह एकजुट नजर आ रही हैं।
राष्ट्रपति से IRGC तक सबने दिया समर्थन
मोजतबा खामेनेई के चयन को ईरान की लगभग सभी प्रमुख संस्थाओं का समर्थन मिला है। राष्ट्रपति, पुलिस, संसद के स्पीकर, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC, बासिज पैरामिलिट्री बॉडी, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल और इंटेलिजेंस मिनिस्ट्री सभी ने नए सुप्रीम लीडर के प्रति अपनी पूर्ण निष्ठा जाहिर की है। सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट कह दिया है कि वे नए सुप्रीम लीडर के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार हैं।
अमेरिका-इजरायल को एकता का कड़ा संदेश
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार मोजतबा के पीछे इस तरह एकजुट होना ईरान की तरफ से अमेरिका और इजरायल को एक स्पष्ट और कड़ा संदेश है। ईरान यह बताना चाहता है कि अली खामेनेई और अन्य शीर्ष नेताओं की हत्या के बावजूद तेहरान में सत्ता को अस्थिर करना किसी विदेशी ताकत के लिए इतना आसान नहीं होगा।
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी सुप्रीम लीडर के चुनाव में हस्तक्षेप की बात कही थी। वहीं इजरायल ने न केवल नए लीडर बल्कि उन्हें चुनने वाली काउंसिल पर भी हमले की धमकी दी थी। इन सबके बावजूद ईरान ने अपना फैसला सुनाकर दुनिया को स्पष्ट संकेत दे दिया है।
कौन हैं मोजतबा खामेनेई?
56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई अपने पिता अली खामेनेई के मुकाबले धार्मिक रूप से और भी कट्टर माने जाते हैं। उन्हें IRGC की पहली पसंद बताया जाता है और मौलवियों के बीच भी उनकी गहरी साख है। इराक-ईरान युद्ध के दौरान उन्होंने सैन्य सेवा भी की है। हालांकि अब तक वे सार्वजनिक जीवन से काफी दूर रहे हैं और ज्यादातर अपने पिता के इर्द-गिर्द ही सक्रिय रहे।
ईरानी जनता अब अपने नए सुप्रीम लीडर का सार्वजनिक संबोधन सुनने की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रही है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा सुरक्षा हालात को देखते हुए मोजतबा का फिलहाल जनता के सामने आना जोखिम भरा हो सकता है।
व्यक्तिगत त्रासदी के बीच सत्ता की विरासत
मोजतबा खामेनेई के लिए यह सफर निजी दुख से भी भरा है। 28 फरवरी को तेहरान में हुए हमले में उनके पिता अली खामेनेई के साथ-साथ उनकी पत्नी जहरा और परिवार के अन्य सदस्य भी मारे गए। इस गहरे व्यक्तिगत आघात के बावजूद मोजतबा ने देश की बागडोर संभालने का दायित्व स्वीकार किया है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ईरान का यह नया नेतृत्व आने वाले दिनों में किस दिशा में कदम बढ़ाता है।